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पत्रकारिता का महत्व,छोड़ उसका दुरुपयोग,करने लग जाएंगे तो सत्ता भ्रष्ट और अहंकारी हो जाएगी

Leave aside the importance of journalism and start misusing it, the government will become corrupt and arrogant.

महासमुंद छत्तीसगढ़ संवाददाता नामदेव साहू = पत्रकारिता तो पौराणिक काल से चली आ रही है हनुमानजी,नारदजी,मंथरा, शकुनी,शूर्पणखां और रावण ये धर्मग्रंथों के पात्र हैं लेकिन सब पत्रकारिता के प्रतीक भी हैं। फेक न्यूज,नकारात्मक जर्नलिज्म, सच से परे पत्रकारिता तब से ही चली आ रही है लेकिन पत्रकार हो तो हनुमानजी जैसा जो पॉजिटिव जर्नलिज्म तो करे ही, वक्त आने पर सत्ता की आंख में आंख डाल कर सच कहने का साहस भी रखे। यदि पत्रकार सत्ता के तलुवे चाटने लग जाएगा तो सत्ताधीश अहंकारी और भ्रष्ट हो जाएंगे। पत्रकारों का किरदार तो आदिकाल से चला आ रहा... पत्रकारों का किरदार तो आदिकाल से चला आ रहा है। 

Mahasamund Chhattisgarh Correspondent Namdev Sahu = Journalism has been going on since mythological times. Hanumanji, Naradji, Manthara, Shakuni, Shurpanakhan and Ravana are the characters of religious scriptures but all are also symbols of journalism. Fake news, negative journalism, journalism beyond the truth has been going on since then, but if you are a journalist then you should do positive journalism like Hanumanji and also have the courage to look the power in the eye and tell the truth when the time comes.If journalists start licking the soles of those in power, those in power will become arrogant and corrupt. The role of journalists has been going on since time immemorial. The role of journalists has been going on since time immemorial.

जिसका धर्मग्रंथ गवाह भी है। शास्त्र नुसार रावण और शूर्पणखां फेक पत्रकारिता करते रहे लेकिन हनुमान जी ने सदैव पॉजिटिव पत्रकारिता की। वही मंथरा व शकुनी भी नकारात्मक पत्रकारिता करते रहे। यदि पत्रकार सत्ता के तलुवे चाटने लगेगी तो वो भ्रष्ट और निरंकुश हो जाएगी। पत्रकारों की आंख और कलम में सच लिखने का साहस और तेज होना चाहिए। आज तो पार्टियों के पत्रकार हो गए हैं। सिर्फ पत्रकार के पास जानकारी के साथ ज्ञान और समझ होना पर्याप्त नही है लेकिन उसके पास परिश्रम और आत्मविश्वास भी होना चाहिए। मुंह पर तारीफ पर फूल मत जाना। आपके पीठ के पीछे आपके काम की तारीफ हो, ऐसी पत्रकारिता ही सार्थक और पहचान देने वाली होती है। नेगेटिव पत्रकारिता करने वालों की दशा भी शूर्पणखां की तरह एक दिन नाक कान कट जाने जैसी हो जाती है। रावण का जो अंत हुआ उसका कारण उनकी फेक पत्रकारिता को बढ़ावा देना ही था। सीता के अपहरण के लिए उन्होंने मारिच को मृग बन कर लक्ष्मण की आवाज में पुकारने जैसी फेक पत्रकारिता की, परिणाम रामजी के हाथों उनके अंत का कारण भी बन गया।

Of which the scriptures are also witnesses. According to the scriptures, Ravana and Shurpanakhan kept doing fake journalism but Hanuman ji always did positive journalism. Manthara and Shakuni also continued doing negative journalism. If a journalist starts licking the soles of those in power, she will become corrupt and autocratic. The eyes and pens of journalists should have more courage to write the truth. Today they have become journalists of parties.It is not enough for a journalist to have knowledge and understanding along with information but he should also have hard work and confidence. Don't get flattered by praise. When your work is praised behind your back, only such journalism is meaningful and gives recognition. The condition of those doing negative journalism also becomes like that of Shurpan Khan, one day their nose and ears are cut off. The reason for Ravan's end was his promotion of fake journalism.To kidnap Sita, he did fake journalism like calling Marich as a deer and calling in the voice of Lakshman, the result also became the reason for his end at the hands of Ramji.

नारदजी सृष्टि के पहले पत्रकार ...

ब्रह्माजी के मानस पुत्र नारद तीनों लोकों में विचरण करने वाले अपने नामानुकूल अज्ञान का नाश और ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले थे। आज ब्रेकिंग न्यूज का जो सर्वत्र हल्ला है, दुनिया की सबसे बड़ी तीन ब्रेकिंग नारदजी ने की थी। नारद जी ने पहली ब्रेकिंग देवता-दानव युद्ध में समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल की, दूसरी नारद जी के भाई दक्ष के यज्ञ में (पार्वती) सती ने हवन कुंड में कूद कर प्राण दे दिए तब शिवजी को यह खबर दी थी। तीसरी ब्रेकिंग बलराम को तीर्थाटन पर भेजने के बाद यह कहा था कि अब महाभारत का अंत हो गया है, आप लौट आएं। वामपंथी विचारक कहते हैं कि आरएसएस ने नारदजी को पहला पत्रकार बता कर उनका महिमामंडन किया है, तो उन्हें पता होना चाहिए था कि पहले अखबार उदंड मार्तंड में संपादक ने नारदजी को पहला संवाददाता बताया और नारद जयंती के दिन ही अखबार की लॉचिंग भी की थी।

Naradji Srishti's first journalist... 

Narada, the mental son of Brahmaji, who roamed in all the three worlds, was the destroyer of ignorance and spread the light of knowledge as per his name. Today there is a lot of noise about breaking news, the three biggest breaking news in the world were done by Naradji. Narad ji first broke the noise made during the churning of the ocean in the god-demon war, secondly during the yagya of Narad ji's brother Daksh, Sati (Parvati) gave up her life by jumping into the Havan Kund and then gave this news to Shiv ji.Third Breaking: After sending Balram on pilgrimage, it was said that now Mahabharata has come to an end, you should return. Leftist thinkers say that RSS has glorified Naradji by calling him the first journalist, then they should have known that in the first newspaper Udand Martand, the editor called Naradji the first correspondent and had also launched the newspaper on the day of Narada Jayanti.

पत्रकार मूल रूप से दूत ही होता है....

प्रणाम, पुष्प और प्रशंसा ये तीनों अच्छे अच्छों को निपटा देते हैं। पत्रकार मूल रूप से दूत ही होता है जैसे राम के दूत बन कर हनुमान गए थे। नारद और हनुमानजी से सीखिये कि आपका पुरुषार्थ आप के मूल काम में है या नही। हनुमान जी की पत्रकारिता इसका सबसे सफल उदाहरण है। रावण की आंख में आंख डाल कर बात करना, यही साहस, आज के

A journalist is basically a messenger...

 Salutations, flowers and praise, these three destroy all the good and the bad. A journalist is basically a messenger just as Hanuman went as Ram's messenger. Learn from Narad and Hanumanji whether your efforts are in your original work or not. Hanuman ji's journalism is the most successful example of this. To look Ravana in the eye and talk, this is courage, today's

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