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ब्रिटिश काल के कानूनों का होगा अंत आज से लागू होगी भारतीय न्याय संहिता..

The laws of the British era will end and the Indian Justice Code will come into force from today.

तीन नए आपराधिक कानून सोमवार से देशभर में लागू हो जाएंगे, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव आएंगे और औपनिवेशिक काल के कानूनों का अंत हो जाएगा। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ब्रिटिश काल के क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे। नए कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित होगी जिसमें जीरो एफआईआर पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना,एसएमएस (मोबाइल फोन पर संदेश) के जरिये समन भेजने जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सभी जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की अनिवार्य बीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल होंगे।

Three new criminal laws will come into force across the country from Monday, bringing sweeping changes to India's criminal justice system and bringing an end to colonial-era laws. The Indian Judicial Code, the Indian Civil Defense Code and the Indian Evidence Act are the successors to the British-era Indian Penal Code, respectively. , will replace the Code of Criminal Procedure and the Indian Evidence Act.The new laws will establish a modern justice system which will include provisions like zero FIR, filing online complaints with the police, electronic means like sending summons through SMS (mobile phone messages) and mandatory videography of the crime scene of all heinous crimes.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन कानूनों में कुछ मौजूदा सामाजिक वास्तविकताओं और अपराधों से निपटने का प्रयास किया गया और संविधान में निहित आदर्शों को ध्यान में रखते हुए इनसे प्रभावी रूप से निपटने का एक तंत्र मुहैया कराया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नए कानून न्याय मुहैया कराने को प्राथमिकता देंगे जबकि अंग्रेजों (देश पर ब्रिटिश शासन) के समय के कानूनों में दंडनीय कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा,"इन कानूनों को भारतीयों ने,भारतीयों के लिए और भारतीय संसद द्वारा बनाया गया है तथा यह औपनिवेशिक काल के न्यायिक कानूनों का खात्मा करते हैं। नए कानूना के तहत आपराधिक मामलों में फैसला मुकदमा पूरा होने के 45 दिन के भीतर आएगा और पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय किए जाएंगे।

Official sources said that these laws attempted to deal with some of the existing social realities and crimes and provided a mechanism to deal with them effectively in keeping with the ideals enshrined in the Constitution.Union Home Minister Amit Shah said that the new laws will give priority to providing justice whereas the laws of the British era (British rule over the country) gave priority to punitive action.He said,"These laws have been made by Indians,for Indians and by the Indian Parliament and they abolish colonial-era judicial laws.Under the law, the verdict in criminal cases will come within 45 days of completion of the trial and charges will be framed within 60 days of the first hearing.

गैंगरेप पर सजा-ए-मौत

दुष्कर्म पीड़िताओं का बयान कोई महिला पुलिस अधिकारी उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी। नए कानूनों में संगठित अपराधों और आतंकवाद के कृत्यों को परिभाषित किया गया है, राजद्रोह की जगह देशद्रोह लाया गया है और सभी तलाशी तथा जब्ती की कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है, किसी बच्चे को खरीदना और बेचना जम्रन्य अपराध बनाया गया है और किसी नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के लिए मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान जोड़ा गया है।

Death penalty for gangrape
The statement of the rape victims will be recorded by a female police officer in the presence of her guardian or relative and the medical report will have to be submitted within seven days. The new laws define acts of organized crime and terrorism, replace treason with sedition and make videography of all search and seizure operations mandatory.A new chapter on crimes against women and children has been added, buying and selling of a child has been made a criminal offense and a provision for death penalty or life imprisonment for gang rape of a minor has been added.
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