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28 करोड़ के कार्य में लगातार सुर्खियों में रहता हैपिथौरा का गौरव पथ।

Pithora's Gaurav Path remains in the headlines due to the work worth Rs 28 crores.

नामदेव साहू,संवाददाता

महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील में सालो से गौरव पथ का मांग की जा रही थी, सालो के प्रयास के बाद पिछले साल पिथौरा नगर में गौरव पथ (28 करोड़ रु.) को मंजूरी मिली। पूरे क्षेत्र के लोगों ने बहुत ही हर्षित मन से छ.ग. शासन का शुक्रियादा किया था । विगत महीनों से गौरव पथ निर्माण कार्य चल रहा है। गौरव पथ में नगर के अनेक लोगो व्यवसायियों ने अपने मकान दुकान की आहुति भी दे दी। ताकि गौरव पथ मार्ग बनाने में किसी भी प्रकार की समस्या न हो। अब निर्माण कार्य किया जा रहा है तो ठेकेदार की भारी लापरवाही देखने को मिल रही है, नगर में योजनाबद्ध तरीके से गौरव पथ निर्माण कार्य नही किया जा रहा है। 

There was a demand for Gaurav Path for years in Pithora tehsil of Mahasamund district, after years of efforts, Gaurav Path (Rs 28 crore) was approved in Pithora town last year. People of the entire region welcomed Chhattisgarh with great joy. Had thanked the government. Gaurav Path construction work has been going on for the last months. Many businessmen of the city also sacrificed their houses and shops in Gaurav Path. So that there is no problem of any kind in making Gaurav Path Marg.Now when the construction work is being done, huge negligence of the contractor is being seen, Gaurav Path construction work is not being done in a planned manner in the city.

नगर में कही भी गड्डा करके कार्य को अधूरा ही छोड़ दिया जा रहा है, जिसमे पानी का ठहराव, लोगो को आने जाने में भारी समस्या, आए दिन गाड़ियों का एक्सीडेंट हो रहा है। बिजली के खंभों के होते हुए भी रोड को कंक्रीट कर दिया जा रहा है। जिससे बिजली के खंभे रोड के बीच में आ रहे है, साइड इंजीनियर के अनुसार इन खंभों को बाद में फिर से रोड को तोड़कर निकालने की बात कही जा रही है। जिससे साफ है रोड में दुबारा कार्य करना होगा। जिससे रोड में फिर लागत आएगी और शासन को भारी नुकसान होगा। मतलब साफ है, गौरव पथ निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

By creating potholes anywhere in the city, the work is being left incomplete, resulting in stagnation of water, huge problems in commuting of people, and vehicle accidents happening every day. Despite the presence of electric poles, the road is being concreted. Due to which the electric poles are coming in the middle of the road, according to the side engineer, it is being said that these poles will be removed again by breaking the road later. From which it is clear that work will have to be done again on the road.Due to which road costs will again increase and the government will suffer huge losses. The meaning is clear, gross negligence is being taken in the Gaurav Path construction work.

सोचने वाली बात यह है की गौरव पथ निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार को किसका संरक्षण प्राप्त है ? जिसके कारण प्रशासन मौन है? निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं के बावजूद, उच्च अधिकारियों का चुप्पी साधे रहना कहा तक सही? अब देखना यह होगा की प्रशासन कब अपने संज्ञान में लेती है? की इसी प्रकार लगातार सुर्खियों में रहेगा पिथौरा का गौरव पथ ?

The thing to think about is whose protection does the contractor engaged in the Gaurav Path construction work have? Due to which the administration is silent? Despite huge irregularities in the construction work, how far is it right for the top officials to remain silent? Now it remains to be seen when the administration will take it into its cognizance? Will Pithora's Gaurav Path continue to be in the headlines like this?

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