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भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ा लाखों का रिटर्निंग वॉल,घटिया निर्माण के कुछ माह बाद ही गिरने की कगार पर दीवार

पाली जनपद के ग्राम पंचायत मुनगाडीह का मामला.

कविता कश्यप कोरबा 

कोरबा/पाली:- शासकीय निर्माण कार्यो में किस तरह से गुणवत्ताहीन कार्य कराकर भ्रष्टाचार किया जाता है, इसका उदाहरण पाली जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुनगाडीह में देखा जा सकता है। दरअसल इस पंचायत के धनुहारपारा मोहल्ला में स्थित राधासागर तालाब के मेढ़ किनारे निर्माण एजेंसी सरपंच- सचिव द्वारा 7- 8 माह पूर्व रिटर्निंग वाल का निर्माण करवाया गया। जो निर्माण के बाद सवालों के घेरे में आ गया और लाखों रुपए की लागत से हुए कार्य को लेकर गांव के ग्रामीण सशंकित नजर आ रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करते हुए जमकर अनियमित्ता बरतकर भ्रष्टाचार किया गया और लागत से कम राशि का उपयोग कर शेष राशि का गबन कर लिया गया। परिणाम स्वरूप सात- आठ माह में ही वॉल गिरने के कगार पर आ गया है। अब भ्रष्टाचार की पोल खुलते नजर आ रही है।


ग्राम मुनगाडीह के धुनहारपारा में लाखों की लागत से निर्मित रिटर्निंग वाल के काम को लेकर गांव के ग्रामीणों ने सवाल उठाने प्रारंभ कर दिए है। कोई गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठा रहा है, तो कोई सरपंच- सचिव पर भ्रष्ट्राचार के आरोप लगा रहा है। जागरूक ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच रामानंद उइके और सचिव ने अपनी मनमानी करते हुए रिटर्निंग वॉल के निर्माण कार्य में पतला स्तर व बहुत ही कम छड़ का उपयोग किया, साथ ही घटिया सामग्री का उपयोग कर भ्रष्टाचार किया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मुनगाडीह पंचायत द्वारा किए गए अधिकांश निर्माण कार्यो में बेजा भ्रष्टाचार किया गया है। यदि वर्तमान सरपंच कार्यकाल के दौरान कराए गए सभी कार्यों की जांच की जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी। 6- 7 माह पूर्व बनाई गई रिटर्निंग वॉल इसका जीता जागता उदाहरण है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच- सचिव व संबंधित अधिकारियों के द्वारा ज्यादा रुपए बचाने के एवज में वाल का निर्माण किया गया। यदि जिम्मेदार अधिकारी इमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए निगरनी करते तो वॉल टूट कर गिरने की कगार पर नही आती। वहीं रिटर्निंग वॉल निर्माण स्थल पर निर्माण कार्य का साइन बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। निर्माण योजना का नाम, कार्य की लागत व कार्य कब प्रारंभ हुआ यह भी जानकारी नहीं दर्शायी गई है। यह भी अनियमित्ता के दायरे में आता है। अब सवाल यह उठता है कि लाखों रुपए से निर्मित रिटर्निंग वाल के घटिया निर्माण का जिम्मेदार आखिर किसको माना जाएगा? सरपंच- सचिव अथवा वे अधिकारी जिनके निगरानी में कार्य हुआ?

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