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पाली : अमृत से मीठा अगर कुछ है तो वह है भगवान का नाम- पं. विनय मिश्रा..! समाज सेविका गीता नेताम के निवास स्थल पर आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आज समापन

कविता कश्यप= कोरबा 

कोरबा/पाली= परमार्थिक कार्य की कभी समाप्ति नही होती पर मयार्दा के हिसाब से पूर्णता होना निश्चित है। हर वस्तू की प्राप्ति के साथ वियोग भी है। हर एक समय मनुष्य को ईश्वर की भक्ति करना जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए। सांसारीक कार्य करने के बाद पश्चाताप हो सकता है, परन्तु ईश्वरीय भक्ति, साधना, ध्यान, परोपकार के पश्चात् पश्चाताप नही वरन् परम आनन्द, आत्म संतोष की अनुभूति प्राप्त होती है। 

उक्त प्रवचन पाली नया बस स्टैंड, टावर मोहल्ला निवासी समाज सेविका श्रीमती गीता नेताम के निवास प्रांगण मे बीते 24 नवंबर से कलश यात्रा, वेदी स्थापना के साथ आरम्भ श्रीमद भागवत कथा में प्रभु लीला का वर्णन कर रहे कथा व्यास पंडित श्री विनय मिश्रा ने अंतिम दिन पूर्ण भक्तिमयी एवं आध्यात्मिक वातावरण के दौरान व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि अमृत से मीठा अगर कुछ है तो वह भगवान का नाम है, परमात्मा सत्यता के मार्ग पर प्राप्त होंते है, मन- बुद्धि, ईन्द्रियों की वासना को समाप्त करना है तो हृदय में परमात्मा की भक्ति का दीप जलाना पड़ेगा। परब्रम्ह परमात्मा का नाम कभी भी लो, हर समय परमात्मा का चिन्तन करें क्योंकि ईश्वर का प्रतिरूप ही परोपकार है। पंडित श्री मिश्रा ने कथा के अंतिम दिन सूकदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई श्रीमद् भागवत कथा को पूर्णता प्रदान करते हुए कथा में विभिन्न प्रसंगो का वर्णन किया। उन्होंने अंतिम दिन की कथा मे अग्र पूजा के दौरान शिशुपाल द्वारा श्रीकृष्ण का अपमान करने के पश्चात् श्री कृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध, गुरू भक्त सुदामा एवं श्री कृष्ण का द्वारिका मे परम स्नेही मिलन, श्री कृष्ण का स्वधाम गमन एवं अंत मे राजा परिक्षित को मोक्ष प्राप्ति के प्रसंगो को सुनाया। कथा के दौरान श्री कृष्ण के भक्तिमयी भजनों की प्रस्तुति व महाआरती से पांडाल मे उपस्थित भक्तगण झूम उठे तथा दोनों हाथ ऊपर उठा कर श्री कृष्ण भजनों पर झुमते हुए कथा एवं भजनों का आनन्द और पंडित श्री का आशीर्वाद लिया। स्वर्गीय श्रीमती कंचन देवी की सद्गति एवं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ एवं वार्षिक श्राद्ध का आज अंतिम दिन गीतापाठ, तुलसी वर्षा, हवन, कपिलातर्पण, सहस्त्रधारा एवं ब्रम्हभोज के साथ समापन होगा

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