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दो वर्ष से बिना गांधी का रहा पाली नगर का गांधी चौंक,कछुआ गति से चल रहा सौंदर्यीकरण का काम, गांधी जयंती पर निर्माणाधीन स्थल में स्थापित किया बापू की प्रतिमा

 कविता कश्यप जिला ब्यूरो कोरबा

कोरबा/पाली:= 2 अक्टूबर यानि कल का दिन भारत के लिए राष्ट्रीय महत्व का दिन रहा। इस दिन सन 1869 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म हुआ था, जहां उनकी जयंती को देशभर में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया गया। गांधी जयंती पर हर शहर, कस्बा, गांव में स्थित गांधी जी की प्रतिमा के सामने गणमान्यजनो द्वारा एकत्रित हो उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके प्रिय राम भजनों खासतौर पर "रघुपति राघव राजाराम" का गान किया गया। पाली नगर पंचायत कार्यालय के सामने भी पाली का हृदयस्थल कहे जाने वाले पुराना बस स्टैंड, गांधी चौंक विगत 5 दशक से भी अधिक समय से स्थित है। लेकिन बीते 2 वर्ष से यह बिना गांधी का चौंक रहा है। विगत 2009 में पाली ग्राम पंचायत से नगर पंचायत के अस्तित्व में आया, तब भाजपा शासनकाल था। वर्तमान कांग्रेस सत्ता में उमेश चन्द्रा नगर पंचायत अध्यक्ष है, जहां इनके कार्यकाल में 2 वर्ष पूर्व गांधी चौंक के सौंदर्यीकरण का काम प्रारंभ किया तो गया, किन्तु कछुआ चाल से चल रहे कार्य से इन दो वर्षों तक गांधी चौंक बिना गांधी जी की प्रतिमा के रही और इन वर्षों में गांधी जी की जयंती, पुण्यतिथि, स्वाधीनता दिवस, गणतंत्र दिवस पर जिस महापुरुष के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता रहा वह भी गुजरे दो वर्ष में देखने को नही मिला। इस दौरान बाहर से आने वाले लोग भी गांधी चौंक विकास के नीचे दबे गांधी जी की और चौंक की खोज करते यह पूछ ही लेते की कहाँ है पाली का गांधी चौंक! इन दो वर्षों में नगर निवासी भी गांधी चौंक को लगभग भूल चुके थे। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा गांधी जयंती से एक दिन पूर्व निर्माणाधीन सौंदर्यीकरण गांधी चौक स्थल पर गांधी जी की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है, जहां उनकी 154वीं जयंती मनाई तो गई लेकिन उनके प्रतिमा से चिपके प्लास्टिक आवरण उतारने की जहमत भी उतारने की जरूरत नही समझी गई। राष्ट्रपिता के रूप में बापू गांधी जी के प्रतिमा को भले ही स्थापित कर दिया गया, लेकिन व्यवहार में बापू जी की प्रति यह उपेक्षा नगर पंचायत प्रशासन पर एक सवाल खड़े करता है। प्रदेश में कांग्रेश की सरकार है और नगर पंचायत में सत्ता के नुमाइंदे खुद को नेहरू और गांधी का बताकर राजनैतिक रोटी सेक रहे है। लेकिन जब गांधी जी की बात आयी तो जरूरत के हिसाब से उन्हें याद कर और श्रद्धांजलि देकर अपने कर्तव्यों की इश्रिती कर ली गई। जबकि आगे पाली स्थित गांधी चौंक सौंदर्यीकरण के दौरान गांधी जी की प्रतिमा प्लास्टिक के थैले में लिपटे धूल फांकते जमे रहेगी। बहरहाल नगर पंचायत द्वारा गांधी चौंक के कायापलट की दिशा में एक बेहतर कार्य किया जा रहा है यह बेहद प्रसंशनीय है और सौंदर्यीकरण के बाद गांधी प्रतिमा स्थल की खूबसूरती लोगों को आकर्षित भी करेगी। लेकिन क्या इस सौंदर्यीकरण में सुस्त कार्य रवैया अपनाया जाना और राष्ट्रपिता के प्रतिमा की उपेक्षा किया जाना नगर पंचायत प्रतिनिधि व प्रशासन के साथ राजनेताओं के लिए शोभनीय है?

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