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रामभद्राचार्य द्वारा स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज पर की गई टिप्पणी निंदनीय-अग्निपीठाधीश्वर

गोटेंगाव मार्कंडेय आश्रम अमरकंटक धाम से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य अग्नि पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्म ऋषि रामकृष्णानंद जी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड सिवनी में चल रही राम कथा में की गई टिप्पणी को निंदनीय कहा है अग्नि पीठ आदिश्वर जी ने बताया शंकराचार्य जी को कांग्रेसी कहकर रामभद्राचार्य जी ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी के प्रति आस्थावान लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं यह उन्हें शोभा नहीं देता साधु संतों का कम सम दृष्ट होना है ना कि राजनीतिक मंचन करना रामभद्राचार्य जी के द्वारा शंकराचार्य जी को कांग्रेसी कहना सरासर गलत बात है ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे आजादी के आंदोलन में उसे समय कांग्रेस पार्टी अगवा के रूप में कार्य कर रही थी इसलिए विभिन्न स्थानों पर भारत देश की स्वतंत्रता के लिए आजादी के आंदोलन के लिए कांग्रेस पार्टी की स्थापना हुई थी भारत देश के स्वतंत्र होने के पश्चात करपात्री महाराज के नेतृत्व में राम राज्य परिषद का गठन हुआ जिसने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ पूरे भारत में प्रत्याशी खड़े कर चुनाव लड़ा जिसके अध्यक्ष पूज्य गुरुदेव थे इसके पश्चात गौ रक्षा आंदोलन के समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ संसद का घेराव पूज्य गुरुदेव ने करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में किया आगे चलकर राम मंदिर का ताला खुलवाने का काम पूज्य गुरुदेव के निर्देशन में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया निर्मल गंगा का मामला हो या रामसेतु का मामला हो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जंतर मंतर में धरना दिया राम मंदिर आंदोलन के समय अदालत में पूज्य गुरुदेव के द्वारा दिए गए सबूत और शास्त्रों से कही बातों के आधार पर राम जन्मभूमि आंदोलन में सनातन धर्म के लोगों को विजय श्री प्राप्त हुई राम मंदिर आंदोलन में पूज्य गुरुदेव पक्षकार थे अब वर्तमान समय की बात की जाए तो वर्तमान सरकारों के द्वारा पूज्य गुरुदेव से बिना विचार विमर्श किये नकली शंकराचार्य को ट्रस्ट का सदस्य बना दिया गया इस तरह पूज्य गुरुदेव हमेशा सनातन धर्म एवं न्याय एवं शास्त्र सम्मत बातों के समर्थक रहे हैं ना कि किसी पार्टी के वर्तमान परिवेश में आपके द्वारा दिए जा रहे वक्तव्य निश्चित ही किसी पार्टी के प्रति आपके प्रेम को दर्शाता है अतः आप शंकराचार्य जी के खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी से बचें अन्यथा की स्थिति में आपके खिलाफ लाखों की संख्या में शंकराचार्य जी के शिष्य एवं साधु संतआंदोलन करेंगे इसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार हैं पहले भी आपके द्वारा शंकराचार्य जी के खिलाफ टिप्पणियां की गई है अतः आप समदृष्टा होते हुए शंकराचार्य एवं साधु संतों के खिलाफ बोलने से बचें दंड संन्यास लेते हुए भी आपके द्वारा दंडी संन्यासी की जो चैत्र मास की परंपराएं होती हैं उनका खुला उल्लंघन आप किन सन्यासी परंपराओं को मान रहे हैं इस चीज को दर्शाता है भविष्य में आप पूज्य गुरुदेव शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के विषय पर बोलने के पहले सोचे समझे तभी आप कोई वक्तव्य रखें क्योंकि आपके द्वारा दिया गया वक्तव्य लाखों सनातनी धर्म के मानने वाले शंकराचार्य परंपरा के भक्तों को ठेस पहुंचाते हैं। 

गोटेंगाव से मनीष मिश्रा

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