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CG= धाकड़ क्षत्रिय समाज ने निर्माण कार्य रोकने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

 बस्तर धाकड़ क्षत्रिय समाज ने निर्माण कार्य रोकने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

हरि सिंह ठाकुर जिला ब्यूरो बस्तर 

जगदलपुर के मावली माता मंदिर परिसर में बस्तर धाकड़ छत्रिय का विशेष बैठक आयोजित की गई थी जिसमें मावली माता मंदिर परिसर में प्रस्तावित टीन शेड निर्माण एवं जगन्नाथ मंदिर भोग सार निर्माण को रोकने संबंधित चर्चा की गई, धाकड़ क्षत्रिय समाज का कहना है कि मावली मंदिर परिसर में प्रस्तावित टीन शेड निर्माण एवं जगन्नाथ मंदिर भोगसार निर्माण किया जाना अनुचित है। मावली माँ बस्तर की आराध्य देवी है और शहर के हृदय स्थल पर मां का मंदिर स्थापित करने के पीछे भी धार्मिक कारण है, इसलिए यह मंदिर परिसर ऐतिहासिक गौरवशाली धार्मिक आस्था का केन्द्र बिन्दु है, जो बस्तर महापर्व दशहरा पर दिखाई देता है इसी कारण इस आस्था के केन्द्र के स्वरूप को टीन शेड लगाकर बदलना न्यायसंगत न होगा। मंदिर परिसर का वर्तमान खुला स्वरूप देवी मंदिरों में सदियों से चली आ रही बलि प्रथा के अनुरूप है, क्योंकि देवी मंदिरों में बलि खुले आसमान के नीचे दिया जाता है न कि टीन शेड या छत वाली जगह पर, साथ ही वर्तमान खुला स्वरूप दिखने में भी बहुत सुन्दर लगता है। टीन शेड निर्माण में मंदिर परिसर स्थित अन्य मंदिर भी ढक जायेगा और परिसर की सुन्दरता भी नष्ट हो जायेगी।

साथ ही जगन्नाथ मंदिर हेतु मावली मंदिर परिसर में भोगसार निर्माण की जरूरत नहीं है, क्योंकि जगन्नाथ मंदिर परिसर में दो-दो भोगसार पूर्व निर्मित है । मावली परिसर मावली मां का है वहाँ मावली माँ हेतु भोगसार निर्माण किया जाना चाहिए ।

टीन शेड निर्माण एवं जगन्नाथ मंदिर भोगसार निर्माण अनुचित है - अनिल पुजारी

बस्तर के महापर्व दशहरा में मावली मंदिर परिसर में विभिन्न गांव, जिला से आंगादेव, लाठदेव, बैरंग, छतर आकर रूकते हैं और वे सब मंदिर परिसर में खेलते हैं, जिसे हम भ्रमण करना भी कह सकते हैं। बड़े-बड़े 15-20 फीट के लाठदेव को लहराया जाता है । आँगादेव बड़ी तेजी से इधर-उधर दौड़ते हुऐ पूरे परिसर में चक्कर लगाते हैं। टीन शेड निर्माण से देवी-देवताओं के इन गतिविधियों में बाँधा पहुँचेगी और उनकी पूजा अर्चना भी बाधित होगी।

मावली मंदिर परिसर में मावली माँ मंदिर के अतिरिक्त, काली कंकालीन मां मंदिर, पाठदेव बाबा मंदिर, कलंकी मंदिर भी स्थित है और इन सभी मंदिरों में बलि प्रथा का प्रचलन है जो सदियों से निर्विघ्न रूप से चला आ रहा है और यह प्रथा खुले आसमान के नीचे ही किया जाता है टीन शेड निर्माण से इस प्रथा में विघ्न आयेगा और धार्मिक भावना भी आहत होगा। मावली मंदिर परिसर बलि स्थल है साथ ही महापर्व दशहरा पर्व के समय देवी देवताओं के लिए आरक्षित है। भगवान जगन्नाथ जो कि सात्विक भोग के भगवान है, उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से 2-3 कि.मी. तक की दूरी के होटलों तक में सात्विक भोजन (प्याज, लहसुन बिना) बनाया जाता है ऐसे भगवान के लिये ऐसे स्थल पर महाभोग बनाकर अर्पित करना ही महापाप है, परन्तु प्रतिवर्ष गोंचा पर्व में भगवान के लिए महाभोग उसी स्थल पर बनाया जाता है जहाँ बस्तर महापर्व पर बलि दिया जाता है और अब स्थायी रूप से मावली मंदिर परिसर पर भोगसार निर्माण करना जगन्नाथ भगवान के भक्तों के साथ एक धोखा है, क्योंकि सात्विक भोजन सात्विक स्थल पर ही बनाया जाता है।

मावली मंदिर हेतु भोगसार की अति आवश्यकता है वर्षों से भोगसार की माँग प्रशासन से किया जा रहा है, क्योंकि बस्तर के महापर्व दशहरा का निशा जात्रा विधान जो कि अनुपमा टाकीज के पास स्थित निशा जात्रा मंदिर में सम्पन्न होता है वहाँ देवी मां के भोग हेतु भोग प्रसाद मावली मंदिर के भोगसार में बनाकर 12 राउत द्वारा 12 कावड़ में हंडियों पर रखकर ले जाया जाता है, परंतु भोगसार के अभाव में माता का प्रसाद वहीं खुले में बनाकर ले जाया जा रहा है। प्रतिवर्ष महापर्व दशहरा एवं चैत्र नवरात्रि में मावली मंदिर में ज्योति कलश प्रज्जवलित किया जाता है, परंतु ज्योति कलश भवन के अभाव में पुजारी द्वारा वहाँ माँ के सम्मुख ज्योति कलश रखा जाता है, जिसके तपन और जगह के कमी के चलते सम्पूर्ण नवरात्रि भर परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन से ज्योति कलश भवन की माँग भी किया गया है जो अब तक पुरा नहीं हो सका है। जगन्नाथ मंदिर परिसर एवं मावली मां मंदिर परिसर अलग-अलग स्थित है । जगन्नाथ मंदिर परिसर में पूजा अर्चना एवं भोगसार हेतु पर्याप्त जगह है, जहाँ नया भोगसार निर्माण किया जा सकता है । मावली मंदिर परिसर मावली माँ का है जहाँ थोड़ी जगह है वहाँ भविष्य में प्रशासन के सहयोग से भोगसार एवं ज्योति कलश भवन का निर्माण किया जाना है। प्रस्तावित टीन शेड निर्माण एवं जगन्नाथ मंदिर भोगसार निर्माण को अवरुद्ध किया जाना चाहिए।

 बैठक में नरेंद्रसिंह ठाकुर सिकंदरसिंह ठाकुर भूपेंद्रसिंह अनिल ठाकुर पुजारी, तुलाराम ठाकुर,मुरली ठाकुर, सोनाधर सिंह,बद्रीनाथ ठाकुर, पूरन सिंह,उमाशंकर ठाकुर,बली सिंह,राजूराम, लक्ष्मण सिंह,शंकरसिंह मोहनसिंह,कृष्णा,प्रेमसागर,हाकिम सिंह मंजू ठाकुर एवं समस्त धाकड़ बंधु उपस्थित रहे।

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