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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस से बढ़ा अभिभावकों पर बोझ

भटगांव = शिक्षा दान महादान जैसी बात अब नहीं रही। शिक्षा का पूरी तरह व्यवसायीकरण हो गया है। आए दिन नए-नए निजी विद्यालय खुल रहे हैं।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस से बढ़ा अभिभावकों पर बोझ


योगेश केसरवानी जिला ब्यूरो सारंगढ़ 

 अंग्रेजी माध्यम और गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के नाम पर प्राइवेट स्कूलों में लूट खसोट है। निजी विद्यालय प्रबंधन की ओर से एडमिशन, ट्यूशन, विकास सहित अन्य शुल्क में  बढ़ोतरी की गई है। प्रवेश, बिल्डिग, खेल, पानी, बिजली, चिकित्सा, ट्यूशन फीस के नाम पर नामांकन के समय ही मनमाना वसूली होती है। री-एडमिशन के नाम पर भी पैसा लिया जा रहा है। बच्चों का प्रवेश शुल्क, कापी, किताब, ड्रेस खरीदने में अभिभावक त्राहिमाम कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन भी इस पर मौन है। जिससे नगर के आधा दर्जनों नामी निजी विद्यालयों पर न तो किसी तरह का सरकारी अंकुश है और न ही किसी तरह का दबाव  परिणाम हैं कि निजी विद्यालय के संचालक अपनी मर्जी फीस तय करते हैं और अभिभावकों से वसूलते हैं। हर निजी विद्यालय का अपना-अपना फीस है। इस पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं दिखता है। जहां तक फीस की बात है तो हर स्कूल में अपने-अपने तरीके से फीस निर्धारित है। क्षेत्र में बहुत से ऐसे निजी स्कूल है जो कि अभी तक शिक्षा विभाग से मान्यता तक नहीं मिला है फिर भी एक दो तीन कमरे में स्कूल संचालित किया जा रहा है ना खेल का मैदान ना ही मूलभूत सुविधाएं भी नदारद है मिली जानकारी अनुसार कुछ स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक द्वारा अपने ही स्कूल के छात्र छात्राओं को ट्यूशन पढ़ाया जा रहा है ट्यूशन नहीं पड़ने पर प्रैक्टिकल मार्क कम देने की धमकी देने की वजह से मजबूर होकर बच्चे मजबूरी में ट्यूशन जा रहे हैं यहां तक निजी स्कूलों के संचालक द्वारा स्थानांतरण प्रमाण पत्र निकलने पर फीस लिया जा रहा है निजी स्कूलों की मनमानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग को इनके मनमानी की पूरी जानकारी होते हुए भी  कार्यवाही नहीं किया जाता निजी स्कूल आज  व्यावसायिक रूप ले चुका है। शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूल खोलने की अनुमति सरकारी मापदंडों के आधार दिया जाता है लेकिन अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा सरकारी मापदंडों के बिना ही स्कूल संचालित किया जा रहा और ना ही जिम्मेदार विभाग द्वारा जांच की जा रही है ऐसे में जिला शिक्षा विभाग पर ऊंगली उठना लाजिमी है। गुप्त सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा राज्य के गरीब परिवार के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में निशुल्क शिक्षा देने के लिए प्रदेश भर आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने की वजह क्षेत्र निजी स्कूलों की मीटिंग के दौरान इस संबंध में सरकार की घोर निन्दा किया गया और सरकार का विरोध करने को कहा गया इसके बावजूद सरकार के ही जिम्मेदार विभाग द्वारा बिना मापदंडों के स्कूल खोलने की अनुमति देना कई प्रश्नों को जन्म दे

रही है। कम पैसों पर शिक्षकों की नियुक्ति कर संचालक मालदार बनकर जगह जगह ज़मीन की खरीदारी कर रहे हैं और स्कूलों द्वारा जो आवक जावक की जानकारी शासन-प्रशासन को ग़लत जानकारी दी जा रही है जो जांच की विषय है। निजी स्कूलों की मनमानी की पोल खुलेगी अगले पार्ट के जनसंवाद में जरुर पढ़िए।

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