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पंचायत भवन मरम्मत, कोरोना काल मे फर्जी मुफ्त चांवल, क्वारन्टीन सेंटर, मास्क- सेनिटाइजर के नाम पर लाखों गटकने वाले पचरा सरपंच- सचिव का एक और कारनामा

पंचायत भवन मरम्मत, कोरोना काल मे फर्जी मुफ्त चांवल, क्वारन्टीन सेंटर, मास्क- सेनिटाइजर के नाम पर लाखों गटकने वाले पचरा सरपंच- सचिव का एक और कारनामा : कागजों में कराया मंच मरम्मत और फर्नीचर खरीदी का दो बार में चार गुना अधिक राशि निकाल डकारे


कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- पंचायत भवन का एक बार सामान्य मरम्मत करा और अलग- अलग तिथि में 6 बार मे 1.88 लाख की राशि निकालने सहित कोरोना आपदा काल मे 1 लाख का फर्जी मुफ्त चांवल बांटने, क्वारन्टीन सेंटर में 2.30 लाख का सामाग्री क्रय और 30 हजार का मास्क- सेनिटाइजर खरीदी कागजों में कराकर मूलभूत, 14वें एवं 15वें वित्त मद से लाखों रुपए गटकने वाले सरपंच चंद्रभूषण सिंह और सचिव सुरेश मिरी के मिलीभगत से भ्रष्ट्राचार भरे एक और कारनामा सामने आया है, जिसमे पंचायत भवन के लिए फर्नीचर क्रय तो एक बार की गई लेकिन दो बार मे खरीदी से चार गुना अधिक राशि निकाल ली गई, वहीं मंच मरम्मत का कार्य भी कागजो में कराकर ग्राम विकास के लिए पंचायत को जारी राशि मे डांका डाला गया।

ग्राम विकास व ग्रामीण जनता के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए शासन द्वारा पंचायत खाते में जारी राशि से धरातल पर कम और कागजों में ज्यादातर काम कराकर बंटाधार करते हुए अपना विकास करने वाले यहां के सरपंच- सचिव ने मंच मरम्मत कागज मे कराकर बाउचर की तिथि 7 जून 2022 को 49.990 हजार की राशि 15वें वित्त से निकाल लिया। वहीं पंचायत भवन कार्यालय के लिए फर्नीचर सामाग्री में कुर्सी, टेबल की खरीदी तो की गई लेकिन जिसके आड़ में रिचार्ज तिथि 1 जून 2020 को 01 लाख व तिथि 1 मार्च 2022 को पुनः 1 लाख का आहरण करते हुए खरीदी से चार गुना अधिक राशि मूलभूत से निकाल ली गई। जिसे लेकर इस पंचायत के जानकार ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय भवन के लिए जो फर्नीचर सामान खरीदा गया है, उसकी अधिकतम क्रय राशि 40 हजार आयी होगी। दूसरी ओर मंच निर्माण के बाद आज पर्यन्त उसका उपयोग ही नही हुआ और धीरे- धीरे जर्जर होकर रह गया है जिसका किसी तरह का मरम्मत कार्य नही कराया गया है। ग्रामीणों की माने तो सरपंच- सचिव पंचायत संबंधी हर एक कार्यो में अपना निजी हित साधने से नही चूकते। संबंधित अधिकारी भी ऐसे जो कभी गौठान निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग को छोड़ ग्रामीणों के बुनियादी समस्याओं और पंचायत संचालन कार्य की ओर कभी झांकने तक नही आए। ऐसे में अधिकारियों की निष्क्रियता कहें या वरदहस्त सरपंच- सचिव के हौसले आसमान की बुलंदियों को छूने लगी है और वे मतवाले हाथी की तर्ज पर पंचायती कार्यों को अंजाम देते हुए सरकारी धन पर जमकर लूट-खसोट मचा रखे है। सरपंच- सचिव के कार्यों को लेकर काफी त्रस्त रहने वाली इस गांव की जनता ने पंचायत कार्यों में किये गए और भी भ्रष्ट्राचार के प्रमाण उपलब्ध कराए है, जिसे अगले खबर में प्रसारित किया जाएगा।

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