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आपदा को अवसर बना कोरोना काल मे बांटा एक लाख का फर्जी मुफ्त चांवल, क्वारन्टीन सेंटर में ठहरे प्रवासी मजदूरों के लिए 2.30 लाख का सामाग्री क्रय

आपदा को अवसर बना कोरोना काल मे बांटा एक लाख का फर्जी मुफ्त चांवल, क्वारन्टीन सेंटर में ठहरे प्रवासी मजदूरों के लिए 2.30 लाख का सामाग्री क्रय, मास्क- सेनिटाइजर पर 30 हजार खर्च 

ग्रामीणों ने सरपंच- सचिव के क्रियाकलापो को लेकर खड़े किए सवाल.

कविता कश्यप जिला ब्यूरो कोरबा 

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- गत कोविड-19 महामारी के भयानक त्रासदी के दौरान जब लोग अपने- अपने घरों में दुबके पड़े थे और जब सरकार इससे बचाव व राहत कार्य करते हुए हर एक परिवार को निशुल्क में खाद्यान उपलब्ध करा रही थी। तब कई ग्राम पंचायतों के सरपंच- सचिव ने इस आपदा को अवसर में बदल शासकीय राशि का खूब वारा न्यारा किया। पचरा सरपंच- सचिव ने भी मिलकर कोरोना त्योहार मनाते हुए मूलभूत एवं चौदहवें वित्त मद की राशि का मनमाने ढंग से उपयोग करते हुए एक लाख का फर्जी मुफ्त चांवल वितरण, क्वारन्टीन सेंटर में ठहरे प्रवासी मजदूरों के लिए 2.30 लाख का सामाग्री खरीदी और मास्क- सेनिटाइजर पर 30 हजार आहरण कर शासन को बिल प्रस्तुत किया गया। मामले को लेकर यहां के ग्रामीणों ने सरपंच- सचिव के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए है।

पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत वनांचल ग्राम पंचायत पचरा को कोविड-19 आपदा काल के दौरान शासन द्वारा मूलभूत व चौदहवें वित्त मद में लाखों की राशि जारी किया गया था, लेकिन इस राशि का यहां के सरपंच एवं सचिव द्वारा मिलकर जरूरतमंदों को निशुल्क चांवल वितरण, प्रवासी मजदूरों के लिए बनाई गई क्वारन्टीन सेंटर हेतु सामाग्री खरीदी सहित सेनिटाइजर- मास्क वितरण के नाम पर बिना किसी मापदंड के बेहिसाब राशि खर्च बताकर संबंधित विभाग को बिल प्रस्तुत करते हुए शासन के आंख में धूल झोंकने का काम किया गया। जहां कोरोना संक्रमण से बचाव व राहत कार्य के नाम पर बाउचर तिथि 01 जुलाई 2020 को मुफ्त राशन वितरण किये जाने हेतु 01 लाख की राशि मूलभूत मद से आहरण किया गया। इसी प्रकार बाहर से आने वाले लोगों व प्रवासी मजदूरों के ठहरने हेतु बनाए गए क्वारन्टीन सेंटर में सामाग्री क्रय के नाम पर 14वे वित्त आयोग से 29 जुलाई 2020 की तिथि में 2.30 लाख की राशि आहरण किया गया है। वहीं मास्क व सेनिटाइजर खरीदी पर 25 जुलाई 2020 को 14वें वित्त से 30.550 हजार खर्च बताया गया है। इस तरह 3 लाख 60 हजार 5 सौ 50 रुपए की राशि सरपंच- सचिव ने मिलकर मूलभूत, 14वे वित्त मद से निकाली है। जहां खर्च राशि को लेकर यहां के ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार द्वारा मुफ्त में राशन वितरण किया जा रहा था तो भला सरपंच- सचिव को मूलभूत की राशि से एक लाख का राशन मुफ्त बांटने की आखिर इतनी आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि गांव की जनता को पंचायत की ओर से मुफ्त राशन बांटा गया है तो किन- किन को बांटा गया यह भी सार्वजनिक करें। वहीं क्वारन्टीन सेंटर में उतने लोग नही ठहरे थे, जितनी राशि सामाग्री क्रय पर निकाली गई है। बात रही मास्क- सेनिटाइजर की तो हमे नही मालूम कब और किसे बंटा। ग्रामीणों ने सरपंच- सचिव के क्रियाकलापों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पंचायत खाते में सरकार से जारी राशि का मनमाने आहरण कर बेझिझक अनियमितता को अंजाम दिया जाता है। गत कोरोना काल के दौरान बचाव व राहत कार्य के नाम पर जितनी बड़ी राशि निकाली गई, बमुश्कित उस राशि का एक तिहाई भी खर्च नही हुआ होगा। उल्लेखनीय है कि पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड अंतर्गत दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्र के अधिकांश पंचायतों के सरपंच- सचिव की मनमानी चरम सीमा पर है, और मूलभूत की राशि इनकी पॉकेटमनी बनकर रह गई है तथा उक्त राशि का उपयोग अधिकतर सरपंच- सचिव अपने निजी हित के लिए अथवा पंचों को खुश करने के उद्देश्य से पिकनिक मनाने में खर्च करते है। वहीं 14वें- 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग फर्जी बिल के माध्यम से किया जाता है। जहां इनके इस कृत्य के तार जनपद पंचायत कार्यालय के बाबुओं से जुड़ी रहती है। जिसके कारण सरकार से जारी राशि का ग्रामीण जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने व अन्य विकास/निर्माण की आड़ में जमकर दुरुपयोग करते हुए अपनी झोली भरने का काम करते है। ऐसे सरपंच- सचिव ग्राम के आधे पंचों को अपने पक्ष में रखकर कागजी घोड़ा दौड़ाते हुए मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति एवं ग्रामीण विकास कर रहे है।

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