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फर्जी बिल के सहारे पचरा सरपंच- सचिव सरकार को लगा रहे चूना : पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर मूलभूत मद व 15वें वित्त आयोग से एक वर्ष में 6 बार निकाली 1.88 लाख की राशि,

फर्जी बिल के सहारे पचरा सरपंच- सचिव सरकार को लगा रहे चूना : पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर मूलभूत मद व 15वें वित्त आयोग से एक वर्ष में 6 बार निकाली 1.88 लाख की राशि, संबंधित अधिकारियों को नही लगी भनक


कविता कश्यप जिला ब्यूरो कोरबा 

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पंचायती राज का गठन किया गया है, जहां ग्राम पंचायत में हर 5 वर्ष के लिए गांव की जनता ग्राम की सरकार चुनती है। जो अपने गांव के विकास के लिए एक जिम्मेदार नागरिक होते है। शासन ग्राम पंचायतों को मूलभूत, 14वें- 15वें वित्त आयोग के माध्यम से प्रत्येक वित्त वर्ष में एक बड़ा फंड उपलब्ध कराती है, ताकि ग्राम पंचायतें अपनी आवश्यकतानुसार सुचारू रूप से ग्रामीण जनता को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के साथ अन्य विकास कार्य करा सके। लेकिन गांव की जनता द्वारा चुने गए कुछ सरपंच धन लिप्सा की चाह में गांव का विकास कम और सचिव के मिलीभगत से खुद के विकास में लिप्त हो पंचायत मद की राशि का दुरुपयोग करने में कोई गुरेज नही करते। कुछ इसी तरह का मामला जिले के पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पचरा का सामने आया है जहां के निर्वाचित सरपंच चंद्रभूषण सिंह ने सचिव सुरेश मिरी से सांठगांठ करते हुए ऐसा पैंतरा अपनाया कि पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर एक ही वर्ष के अलग- अलग तिथि में मूलभूत एवं 15वें वित्त से 6 बार मे 1 लाख 88 हजार 7 सौ 90 रुपए की राशि फर्जी बिल से निकाल ली। दरअसल कुछ पंचों व ग्रामीणों की माने तो गत बारिश के समय पंचायत भवन की छत से पानी टपकने व बाहर का पानी घुसने के कारण पंचायत संचालन में दिक्कतें उत्पन्न हो रही थी, जिसका मरम्मत कार्य एक बार कराया गया है। जिसके बाद किसी तरह का कोई मरम्मत कार्य आज पर्यन्त नही हुआ है। वहीं सरपंच- सचिव की माने तो कागजों में 6 बार पंचायत भवन मरम्मत कार्य दर्शाया गया है। जिसके अनुसार 2022 की रिचार्ज बाउचर तिथि में 15वें वित्त आयोग से 6 जनवरी को 49 हजार, 11 जनवरी- 25 हजार, 27 जनवरी- 25 हजार, 7 जुलाई- 49.990 हजार व 28 दिसंबर- 29.800 तथा मूलभूत मद से बाउचर की तिथि 5 मार्च 2022 को 10 हजार की राशि निकाली गई है। लेकिन अभी तक भ्रष्ट्राचार पर लगाम लगाने वाले संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक नही लग सकी है। ऐसे में देखा जाए तो यहां के सरपंच- सचिव पंचायती राज व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे है और फर्जी बिल के सहारे सरकार को लाखों का चूना लगा रहे हैं तथा शासकीय राशि से ग्राम विकास करने के बजाय अपनी जेबें भर रहे है। यहां के सरपंच- सचिव ने मिलकर कोरोना काल मे मुफ्त राशन वितरण, सोलर स्ट्रीट लाईट, मंच मरम्मत, रनिंग वाटर, प्राथमिक शाला- आंगनबाड़ी भवन मरम्मत, फर्नीचर खरीदी के नाम पर भी फर्जी बिल के माध्यम से मूलभूत, 14वें- 15वें वित्त आयोग के लाखों की राशि का जमकर दुरुपयोग किया है। बहरहाल ग्राम पंचायत का यह मामला कहीं न कही संबंधित विभाग में बैठे अधिकारियों की निष्क्रियता को भी दर्शाता है।

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