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CG=106 घंटे 60 फीट नीचे फंसे बच्चे की बदली जिंदगी, रायपुर

 छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से अलग होकर बने सक्ती जिले के ग्राम पिहरीद निवासी राहुल साहू के घर खुशियां लौट आई है। साल भर पहले जब राहुल 60 फीट गहरे बोर में गिरा, तब परिजनों को भरोसा ही नहीं था कि राहुल उनके बीच वापस आएगा।

Namde sahu = Newskhabar36.in

शासन-प्रशासन ने देश के सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन कर करीब 106 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला था। इसके बाद राहुल देश भर में चर्चित हो गया।

पहले जानिए 10 जून को 60 फीट गहरे बोर में कैसे गिरा था राहुल...
राहुल साहू (12) बीते साल 10 जून की दोपहर घर में खेल रहा था। लेकिन, दोपहर 2 बजे के बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। तब परेशान होकर उसकी मां गीता साहू ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान वह जब बाड़ी की तरफ गई तो राहुल के रोने की आवाज आ रही थी। गड्‌ढे के पास जाकर देखने पर पता चला कि आवाज अंदर से आ रही है।

लौट आई खुशियां, मां-पिता के साथ गांव के लोग भी हैं खुश=

राहुल के पिता रामकुमार साहू अपनी बेटे की जान बचाने के लिए राज्य सरकार की तारीफ करते हुए नहीं थकते। उन्होंने बताया कि जिस समय राहुल बोर में गिरा, तब किसी को कुछ पता नहीं था। लेकिन, मीडिया में खबर आने के बाद जिस तरह से शासन-प्रशासन ने मदद की, उसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकता। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राहुल को बचाने के लिए जिस तरह से प्रयास किया, वह सच में प्रशंसनीय था। गांव के लोग भी शासन-प्रशासन की सक्रियता को अब तक नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने बताया कि बड़े-बड़े अफसर लगातार चार दिन तक रात-रात भर राहुल को सुरक्षित निकालने के लिए जुटे हुए थे।

दिव्यांग राहुल ने पिता को दिलाया रोजगार=

इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपोलो अस्पताल में राहुल से मुलाकात की। इस दौरान उसकी मां गीता साहू और पिता रामकुमार साहू की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए राहुल की मां को उचित रोजगार उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए थे। साथ ही पांच लाख रुपए देने की घोषणा की थी। शासन से मिले पांच लाख रुपए को पिता रामकुमार ने राहुल के नाम बैंक में डिपॉजिट करा दिया है। वहीं, राहुल की मां की जगह रामकुमार को कलेक्ट्रेट दर पर आदिवासी हॉस्टल में नौकरी दी गई है।
राहुल की मां करती हैं टेलरिंग का काम
राहुल की मां गीता साहू गांव में टेलरिंग का काम करती हैं। वह महिलाओं के कपड़े सिलने के साथ ही गांव की युवतियों को सिलाई का प्रशिक्षण भी देती हैं। अब परिवार में खुशी का माहौल है और राहुल भी हंसते-खेलते हुए स्वस्थ है।

माता-पिता बोले- सब ठीक है, पर राहुल ठीक नहीं
राहुल की मां गीता साहू और पिता रामकुमार साहू का कहना है कि इस हादसे से उनके परिवार को नई रोशनी और उम्मीद मिली है। शासन से आर्थिक मदद, नौकरी के साथ ही राहुल की पढ़ाई भी राजधानी रायपुर में चल रही है। लेकिन, राहुल मंदबुद्धि का बालक है। ऐसे में उसे सही इलाज की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अपील की है कि उनके बेटे को जिस तरह से नई जिंदगी दी है, उसी तरह से उसका इलाज हो जाए तो राहुल बोलने और समझने लगेगा।
चला था देश का सबसे बड़ा बोरवेल रेस्क्यू ऑपरेशन
बोरवेल में गिरे राहुल को बचाने के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी थी और राहुल को सुरक्षित निकालने के लिए जिला प्रशासन को हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए गए। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर रखे हुए थे। एक बच्चे को बचाने के लिए देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन लॉन्च किया गया था।

 राहुल साहू को शासन की मदद से रायपुर के अर्पण दिव्यांग पब्लिक स्कूल में दाखिला दिलाया गया है। उसके रहने के लिए फ्री में हॉस्टल की भी व्यवस्था की गई है। यह भी बताया गया कि स्कूल में उसका इलाज भी चल रहा है। राहुल इन दिनों गर्मी की छुट्‌टी में गांव आया था। राहुल अभी भी बोल नहीं पाता। लेकिन, अपनी मां और पापा सहित दूसरे लोगों की बातें समझता है। भले ही राहुल मंदबुद्धि का बालक है। लेकिन, वह बहुत ही चंचल और नटखट है।

बोरवेल का गड्‌ढा 60 फीट गहरा था। राहुल बचपन से ही गूंगा है और वह बोल नहीं पाता। वह मानसिक रूप से भी काफी कमजोर है, जिसके कारण वह स्कूल भी नहीं जाता था और घर पर ही रहता था। इसके बाद हैरान और परेशान होकर उसकी मां गीता साहू ने अपने पति और परिजन को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद शाम करीब चार बजे पुलिस की टीम पहुंची और राहुल को बोर से बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई।

करीब 106 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में 4 IAS, 2 IPS, NDRF और सेना के जवान सहित 500 अफसर-कर्मचारी शामिल रहे। इन सबका बस एक ही मकसद था...राहुल की सलामती। इससे पहले देश में किसी बच्चे के लिए इतना लंबे समय और संसाधन के साथ कोई रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं हुआ था। यह ऑपरेशन 5 दिन तक चला था। इसके बाद राहुल को सुरक्षित बचा लिया गया।


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