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मणिपुर गैंगरेप केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:= कहा- सरकार नहीं तो हम एक्शन लेंगे; ...

मणिपुर =  गैंगरेप केस की रही। इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना की गूंज सड़क, संसद और सुप्रीम कोर्ट तक सुनाई दी। जिस सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों कानून व्यवस्था को चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी बताया था, उसे भी कहना पड़ा कि अगर सरकार कुछ नहीं करेगी तो हम कदम उठाएंगे। हम आपको इस संवेदनशील मामले से जुड़ी अहम जानकारियां भी देंगे...।

लेकिन कल की बड़ी खबरों से पहले आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... मोदी सरनेम केस में राहुल गांधी की तरफ से दाखिल याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सूरत सेशन कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई थी। अगर ये सजा बरकरार रहती है तो राहुल 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे दो दिन के भारत दौरे पर हैं। वे आज दिल्ली में PM मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। श्रीलंका और भारत राजनयिक संबंधों की स्थापना का 75वां साल मना रहे हैं।

1. मणिपुर...महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार; PM बोले- किसी गुनहगार को बख्शेंगे नहीं

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और गैंगरेप के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य सरकार इन्हें फांसी की सजा दिलाने पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस घटना ने 140 करोड़ भारतीयों को शर्मसार किया है। किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, तो हम एक्शन लेंगे। अदालत ने केंद्र और मणिपुर सरकार से पूछा है कि अपराधियों पर कार्रवाई के लिए आपने क्या कदम उठाए हैं।

ये खबर अहम क्यों है: घटना 4 मई को राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले में हुई थी, जिसका वीडियो बुधवार को वायरल हुआ। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच 3 मई से जारी हिंसा में 142 लोगों की मौत हो चुकी है। 5,995 मामले दर्ज किए गए हैं। 6 हजार से ज्यादा लोग हिरासत में हैं। आगजनी की 5 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई है। करीब 60 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। राज्य की कुल आबादी में मैतेई की हिस्सेदारी 53% और कुकी समुदाय की हिस्सेदारी 30% है।

2. राजस्थान में शव रखकर प्रदर्शन करने पर 5 साल तक जेल; नेताओं पर भी होगा एक्शन
राजस्थान में डेड बॉडी रखकर विरोध प्रदर्शन करने वालों को 2 से लेकर 5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। विधानसभा में इससे जुड़ा एक बिल पास हुआ है। इसके मुताबिक, अगर परिजन डेड बॉडी लेने से मना करते हैं तो उन्हें एक साल की सजा हो सकती है। अगर कोई नेता या गैर-परिजन शव का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शन में करेंगे तो उन्हें भी 5 साल तक सजा हो सकती है।

ये खबर अहम क्यों है: = भाजपा ने इसे जनता की आवाज दबाने वाला कानून बताया है। इनका कहना है कि जब भारी अन्याय होता है तभी परिवार मजबूरन ऐसा करता है। सरकार न्याय दिलाने की बजाय सजा दिलवा रही है। उधर सरकार का तर्क दिया है कि डेड बॉडी रखकर धरना देने और नौकरी-पैसों की मांग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साल 2019 से 2023 तक ऐसे 306 मामले सामने आ चुके हैं। कानून नहीं लाते तो यह आंकड़ा और बढ़ता रहता।


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