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विधानसभा चुनाव: विधायक टिकट मांगने वालों को पहले छोड़ना होगा संगठन का पद, 8 जिलाध्यक्ष देंगे इस्तीफा....

कांग्रेस में पिछली बार की तरह इस बार भी विधानसभा चुनाव की दावेदारी करने वाले जिलाध्यक्षों को अपना पद छोड़ना होगा। प्रदेश में अभी तक लगभग 8 जिलाध्यक्षों के पद छोड़ने की बात सामने आ रही है। ये सभी अपने विधानसभा में सक्रिय भी है। ये संख्या और बढ़ भी सकती है। पिछली बार की तरह इस बार भी पद छोड़ने वाले जिलाध्यक्षों को सयुंक्त महामंत्री बनाया जा सकता है।

शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सभी संगठन जिलों की बैठक ली। इस बैठक में ब्लाक से लेकर बूथ तक जानकारी मांगी गई। इसके बाद विधायकी पर जब चर्चा शुरू हुई तो यह बात भी सामने आई कि जो भी जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ना चाहता है, वह पद छोड़कर अपने क्षेत्र में ध्यान दें। इससे संगठन का काम प्रभावित नहीं होगा।

आज प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और तीनों सह प्रभारी जिलाध्यक्षों की विस्तारित बैठक लेंगे। बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद संगठन में बड़े बदलाव होंगे। जिन जिला संगठना में जिलाध्यक्ष पद छोड़ेंगे वहां नई नियुक्तियां होंगी। कई जिलाध्यक्षों का काम संतोषजनक नहीं है, वहां भी बदलाव हो सकते हैं।

आज समितियों की हो सकती है घोषणा

प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा रविवार को रायपुर पहुंचेंगी। बताया जा रहा है कि चुनाव से संबंधित सभी समितियों की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा वे जिलाध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्षों की विस्तारित बैठक लेंगी। बाद में मोर्चा-प्रकोष्ठों की बैठक भी होगी। महामंत्री के दो पद खाली है, इसे भी तय किया जा सकता है।

..और सात महामंत्री भी ठोंक रहे दावेदारी

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में 22 महामंत्री हैं। इसमें से 6 महामंत्री भी विधायक के टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। इन्होंने क्षेत्र में वॉल राइटिंग और संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है। इसमें प्रमुख रूप से अमरजीत चावला, पीयूष कोसरे, वासुदेव यादव, अरूण सिसौदिया, शाहिद खान और अर्जुन तिवारी शामिल हैं।

13 जिलाध्यक्षों ने दिया था इस्तीफा, 4 को मिला टिकट

पिछले चुनाव में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने यह फार्मूला तय किया था। इसके बाद 13 जिलाध्यक्षों ने पद से इस्तीफा देकर विधानसभा चुनाव की दावेदारी की थी। इसमें से चार को पार्टी ने टिकट भी दिया था। इसमें रायपुर पश्चिम से विकास उपाध्याय, बेमेतरा से आशीष छाबड़ा, बस्तर से लखेश्वर बघेल और बिल्हा से राजेंद्र शुक्ला थे। राजेंद्र को छाेड़कर सभी प्रत्याशी जीते थे।

पद छोड़ने की वजह

2018 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने यह देखा कि अगर जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए कोई विधायक का टिकट मांगता है तो वह अपने विस क्षेत्र पर ही ध्यान देगा। जिले की बाकी विधानसभाएं कमजोर हो जाएंगी। इस वजह से भूपेश ने यह फार्मूला बनाया, जिसे इस बार भी लागू किया जा रहा है।


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