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गौमाता की अनोखी सेवा, बच्चों की तरह पालते हैं गायों को; दी ऐसी ट्रेनिंग कि शौच के लिए जाती है बिस्तर से बाहर

बालौद: = हिंदू धर्म में गाय को माता कहा गया है. पुराणों में धर्म को भी गौ रूप में दर्शाया गया है. भगवान श्रीकृष्ण गाय की सेवा अपने हाथों से करते थे और इनका निवास भी गोलोक बताया गया है. इतना ही नहीं गाय को कामधेनु के रूप में सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला भी बताया गया है. हिंदू धर्म में गाय के इस महत्व के पीछे कई कारण हैं जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है. गौमाता की सेवा के कई किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक छोटे से गांव कोसागोंदी का एक परिवार गौमाता की अनोखी सेवा को लेकर चर्चा में है.
बच्चों की तरह करते हैं गौमाता की सेवा
गौ माता बिस्तर से अपने आप उठकर करने जाती है गोबर
गाय दूध बेचते नहीं जरूरतमंद को देते हैं फ्री में
सुबह जलेबी और शाम को देते है दाल चावल

इस गौ भक्त ने गाय के लिए अपने घर में अलग कमरा बना रखा है. यहां उनके लिए स्पेशल बेड भी लगा हुआ है. पूरा परिवार गौ माता की सेवा अपने परिवार के सदस्य की तरह करता है. सबके नाम भी रखे गए हैं. अपना नाम सुनते ही दौड़े चले आते हैं. दरअसल बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक मुख्यालय से करीबन 12 किमी दूर गांव कोसागोंदी के रहने वाले पन्नुराम साहू ओर उनकी पत्नी ललिता साहू गौमाता के भक्त हैं.

पन्नुराम साहू और उनकी पत्नी ललिता साहू ने अपने घर में एक अलग कमरा बनवा रखा है. यहां पर सुबह से लेकर शाम तक गौ माता की सेवा बच्चों की तरह की जा रही है. कमरे में गौ माता के लिए बिस्तर और कपड़े की भी व्यवस्था की गई है. उनके घर में 7 गाय और 17 बछड़े हैं. यानी कुल 24. वो सभी गायों और बछड़ों का परिवार की तरह पालन-पोषण करते हैं. इन्होंने सबके अलग अलग नाम भी रखे हैं और इन गायों को नाम से पुकारा जाता हैं और वे समझ भी जाते हैं. गौ माताओं को ऐसी खास ट्रेनिंग दी गई है कि ये मूत्र का त्याग भी उनके लिए रखे गए डिब्बे में करती हैं.

पन्नुराम साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि गौ माता को खास ट्रेनिंग देकर कमरे में रखा है. गौ माता व बछड़े बिस्तर पर सोते जरूर हैं, लेकिन गौ माता व बछड़ों को पता है कि गोबर कहां करना है. गौ माता बिस्तर से अपने आप उठकर गोबर करने जाती हैं. पन्नुराम साहू ने बताया की गाय की ट्रेनिंग देने में काफी समय लगा. शुरू-शुरू में वह कमरे में ही गोबर कर देती थी, लेकिन लगातार ट्रेनिंग के बाद अब गौ माता सब समझ चुकी हैं. अब गौ माता को परिवार की तरह घर के कमरे में रहते हैं.

पन्नू राम साहू बताते है कि 5 जनवरी 2013 को उनके बड़े बेटे रूपेंद्र कुमार की एक रोड़ एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद से उनकी पत्नी ललिता साहू बीमार रहने लगी. उस दौरान पत्नी को सुबह शाम 1-1 कप दूध की जरूरत थी. तो वे एक गाय ले आये, और उसका जतन करने लगे. कुछ दिन बाद उनकी पत्नी स्वस्थ्य हो गई. तो ऐसे धीरे धीरे कर दोनों पति-पत्नी गौमाता की सेवा में जुट गए. पन्नू का छोटा बेटा एवंत कुमार साहू और बहू वोमेश्वरी साहू भी गौमाता की देखभाल करते हैं, यानी कि पूरा परिवार गौमाता की सेवा करता है. पन्नू राम साहू आगे बताते है कि वे दूध दही की बिक्री नहीं करते. जब गांव में कोई आयोजन होता है, या किसी को जरूरत होती है तो वे दूध दही ऐसे ही दे देते हैं. उनके पास 80 डिसमिल जमीन है, जिसमें ही वे खेती बाड़ी करते है.

ललिता साहू ने बताया कि उनके बड़े बेटे की मृत्यु के बाद से ही इन्होंने गायों और इनके परिवार को अपना परिवार मान पूरे दिल से इनकी सेवा करनी शुरू कर दी. वो कहते हैं कि जब कही भी किसी बछड़े या गाय की मौत होती है, उन्हे बहुत दर्द होता है. ऐसा लगता है मानो परिवार के किसी सदस्य को खो दिया हो.



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