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छत्तीसगढ़ में अनोखी परंपरा= बेटी होने पर मनाते हैं जश्न, पढ़ाई और शादी का पूरा खर्च उठाते................


 छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्राम राजागांव की एक अनोखी परंपरा है. इस गांव में किसी के घर बेटी पैदा होने पर जश्न मनाया जाता है. इस गांव में बेटियों को कोई भी माता-पिता बोझ नहीं समझता है बल्कि उसे ईश्वर का वरदान माना जाता है. बेटी की पढ़ाई और शादी का खर्च गांव वाले मिल जुलकर उठाते हैं.बेटी का विवाह संपन्न कराने के लिए जिन चीजों की आवश्यकता होती है वह तमाम आवश्यक चीजें गांव के लोग इस घर में लाकर मुखिया के पास सौंप देते हैं, जिसमें राशन सामान, नगदी पैसे, कपड़े सभी समानों को इन ग्रामीणों द्वारा इस परिवार के मुखिया को दिया जाता है, ताकि विवाह में किसी तरह की अड़चन ना आए.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ाते हुए जिले राजागांव पंचायत के लोग गांव की बेटियों को अपनी बेटी मानकर उसकी पढ़ाई व शाादी का खर्च मिलजुल कर उठाते हैं. राजागांव के 355 परिवार मिलजुल कर गांव की हर लड़की की शादी में जाति धर्म का भेद भुलकर मदद करते हैं. गांव में 20 जून को दीपका मंडावी की शादी हुई. दीपिका के पिता श्यामनाथ मंडावी की मृत्यु हो चुकी है. दीपका अपने भाई धनेश्वर मंडावी और अपनी माता के साथ राजागांव में रहती है.

हैसियत के मुताबिक मदद करते हैं ग्रामीण

गांव में किसी बेटी की शादी पर ग्राम पंचायत टेंट, डेकोरेशन, बिजली, झालर और चाय-नाश्ते की व्यवस्था करती है. वहीं गांव के ही कुछ संपन्न घरों से बेटी के लिए पलंग, सोफासेट, आलमारी दिया जाता है. आसपास के दूसरे गांव से लोग भी पैसे आदि देकर जरूरी मदद करते हैं. पंचायत का खुद का बैंड है, जिसे शादी में मुफ्त बजाते हैं.

पूर्वजों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन कर रहे: सरपंच

राजा गांव की सरपंच श्याम बत्ती नेताम बताती हैं यह परंपरा आज से नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों से चली आ रही है, जिसका हम लगातार निर्वहन कर रहे हैं. इस कार्य को करने में हम ग्रामीणों को भी काफी अच्छा महसूस होता है. हम भी नहीं चाहते की कोई भी पिता अपनी बेटी को बोझ लगे या उसकी विवाह को लेकर किसी भी तरह की परेशानी हो. यही वजह है कि पूरा गांव मिलकर बेटी की शादी को संपन्न कराने में लग जाते हैं.

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ग्रामीणों कीे निशुल्क देते हैं टेंट, बैंड और बर्तन

पिछले 10 सालो से राजागांव के सरपंच रहे दशरथ नेताम ने अपने कार्यक्रल में पंचायत में फैसला लिया था कि किसी के घर भी बेटी जन्म लेगी तो गांव जश्न मनाया जाएगा. पूरा गांव विवाह में मदद करेगा. तीन बार निर्विरोध सरपंच रहे दशरथ नेताम की पत्नी श्यामबती अब सरपंच हैं. ग्रामीणों की मदद के लिए ग्राम पंचायत टेंट का सामान, सामियाना, बैंड, बर्तन खरीदे हैं, जिसे लड़की के विवाह में निःशुल्क देते हैं.

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