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RTI के तहत विलंब से जानकारी देने पर वन विभाग के अधिकारी पर लगा जुर्माना

नामदेव साहू 

महासमुन्द= सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत समय पर जानकारी नहीं देना सरकारी अधिकारी पर भारी पड़ा। राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में जनसूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई के तहत जानकारी देने हेतु राशि जमा कराने के बाद भी आवेदक को जानकारी बिलंब से देने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। 

पिथौरा के आरटीआई कार्यकर्ता रूपानंद सोई के द्वारा 22 सितम्बर 2018 को सूचना के अधिकार के तहत वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा से जानकारी मांगी गई थी।जयकांत गण्डेचा, वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के द्वारा राशि जमा कराने के बाद मिथ्या एवं भ्रामक जानकारी देने पर आरटीआई कार्यकर्ता रूपानंद सोई के द्वारा छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग में दिनांक 23 फरवरी 2019 को शिकायत की गई। 

आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने मे की गई लापरवाही पर 23 मार्च 2023 को राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी द्वारा जनसूचना अधिकारी जयकांत गण्डेचा, वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के अंतर्गत 10 हजार रुपए का जुर्माना किया है। उक्त अर्थदंड की धनराशि राजकोष में जमा कराने को निर्देशित किया है। 

यह है पूरा मामला=आरटीआई कार्यकर्ता रुपानंद सोई ने 22 सितम्बर 2018 को आरटीआई के तहत कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा का वित्तिय वर्ष 2017-18 का सामान्य मद एवं केम्पा मद की संधारित केश बुक की जानकारी मांगी थी। उक्त कार्यालय के द्वारा जानकारी प्रदान करने हेतु 25 दिसम्बर 2018 को दस्तावेजी शुल्क 2032 रूपये जमा करने हेतु कहा गया उक्त राशि जमा करने के बाद भी जनसूचना अधिकारी जयकांत गण्डेचा जानबुझकर जानकारी देने से टाल-मटोल करता रहा निरंतर संपर्क करने के बाद राशि जमा करने के 39 दिन बाद आवेदक को 1016 पृष्ठ की मिथ्या एवं भ्रामक जानकारी प्रदान की गई । 

मिथ्या एवं भ्रामक जानकारी प्रदान करने पर आवेदक क्षुब्ध हो कर छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग में दिनांक 23 फरवरी 2019 को जनसूचना अधिकारी जयकांत गण्डेचा के खिलाफ शिकायत दर्ज की । उक्त शिकायत पर राज्य सूचना आयोग के समक्ष जनसूचना अधिकारी जयकांत गण्डेचा के द्वारा दस्तावेजी शुल्क जमा करने 39 दिन के बाद विलंब से जानकारी प्रदान करने के संबंध में जो तर्क रखा गया उस तर्क को राज्य सूचना आयोग ने खारिज कर दिया एवं जन सूचना अधिकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा जिला महासमुंद जयकांत गण्डेचा द्वारा आवेदक रूपानंद सोई को जानकारी देन में अधिनियम का उल्लंघन किया जाना प्रमाणित होने से 39 दिवस के विलंब हेतु 250 रुपये प्रति दिन के हिसाब से 9 हजार 7 सौ 50 रूपये का अर्थदण्ड से दण्डीत किया है । साथ ही वन मण्डलाधिकारी महासमुंद को निर्देशित किया गया है कि उक्त जुर्माना राशि जयकांत गण्डेचा वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा से वसूल कर शासकीय कोष में जमा कराने एवं आवेदक रुपानंद सोई को हुए आर्थिक मानसिक क्षति हेतु 30 दिवस के भीतर क्षतिपुर्ति राशि प्रदान करने हेतु कहा गया है।

राज्य सूचना आयोग के इस फैसले के विरुद्ध आवेदक हाई कोर्ट में करेगा अपील

उक्त मामले में आरटीआई कार्यकर्ता रूपानंद सोई का कहना है कि राज्य आयोग द्वारा दी गई फैसला से वे संतुष्ट नहीं है वन परिक्षेत्र अधिकारी जयकांत गण्डेचा के समक्ष आवेदन प्रस्तुति दिनांक 22/09/2018 से जानकारी प्रदाय दिनांक 20/02/2019 तक के इस अवधि में कूल 149 दिन बाद भी दी गई जानकारी , वांछित जानकारी से पृथक होकर मिथ्या एवं भ्रामक जानकारी प्रदान कि गई है । 

जयकांत गण्डेचा के द्वारा वांछित जानकारी प्रदान न करने की अपनाई गई प्रक्रिया सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 18 का घोर उल्लंघन है । उक्त अधिनियम की व्यापक पालना कराने हेतु राज्य सूचना आयोग द्वारा दी फैसला पर्याप्त नहीं है। इस लिए इस फैसले के विरुद्ध छत्तीसगढ उच्च न्यायालय में आवेदक अपील करने की तैयारी में है ।

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