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स्वप्रकट शिवलिंग है आस्था का केंद्र, शिवलिंग के पीछे की क्या है रोचक कहानी जानिए इस लेख में

नामदेव साहू छत्तीसगढ़ संपादक Newskhabar36.in

 छत्तीसगढ के महासमुंद जिला के पिथौरा विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम किशनपुर में स्थित स्वप्रकट शिवलिंग लिंगेश्वर महादेव भी लोगों का आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां पर स्वप्रकट शिवलिंग का दर्शन एवं जलाभिषेक करने के लिए प्रति दिन कई हजार शिव भक्त पहुंचते हैं. इससे जुड़ी और भी रोचक बातें जो इस आर्टिकल में बताएंगे.

खेत में एक पेड के नीचे प्रकट हुए है शिवलिंग

ग्राम किशनपुर के लोगों का कहना है कि लिंगराज बारीक के खेत में एक पेड के नीचे शिवलिंग प्रकट हुए है यह बात गांव के ही शौकीलाल सेठ को सपने में पता चला तभी शौकीलाल सेठ ने दिनांक 28 जूलाई 2022 को हरीयाली अमावस्या के दिन उस खेत में जाकर उसी पेड के नीचे पूजा पाठ करने के लिए साफ सफाई किया तभी वहां शिवलिंग आकार का एक काला पत्थर दिखाई दिया, शौकीलाल सेठ ने उस पत्थर का पूजा-अर्चना कर अपने घर वापस आकर ग्रामीणों को इस घटना की जानकारी दी इसके बाद धीरे -धीरे ग्रामीण वहां पहुचने लगे और भीड बडते गया तथा लोग स्वप्रकट शिवलिंग का पूजा आरती, जलाभिषेक करने लगे, शिव भक्तों का मानना है कि स्वप्रकट शिवलिंग लिंगेश्वर महादेव का पूजा करने से मांगी मुराद पूरी होने लगी है तब से यहां प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ लगती है. 

कैसे पडा लिंगेश्वर महादेव नाम

लिंगराज बारीक के खेत में महादेव प्रकट हुए है इसलिए उक्त स्वप्रकट शिवलिंग का नाम यहां के ग्रामीणों ने एकराय हो कर लिंगेश्वर महादेव रखा । 

दर्शन हेतु भक्तों की भारी भीड

छत्तीसगढ के लगभग सभी जिलों के साथ-साथ अन्य राज्य ओडिसा, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश से भी लोग दर्शन करने पहुच रहे हैं भक्तों कि भारी भीड तो सभी दिन रहता ही है लेकिन सोमवार को भीड कई गुना बड जाती है लगभग दो किलोमीटर कि लंबी लाइन के कतार में लोग कई घंटे खडे होकर अपनी अपनी बारी का इंतजार कर दर्शन करते है । 

रोज लगता है मेला

ग्राम किशनपुर से खैरखुटा जाने वाली सडक के दोनों छोर में अनेक तरह के दुकाने सजी रहती है जिसमें खासकर महिलाओं के शृगांर सामाग्री , बच्चों के लिए आइक्रिम, गुपचुप चाट , चाय नास्ता, कपडे की दुकान, शरीर में बनाने वाली टेटू (गोदना) , कांस पीतल के सामान, बांस से निर्मित घरेलु उपयोग के सामान लोगों को और भी लुभा रही है जिसके कारण किशनपुर आजकल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । 

लग रहा है नारियल का ढेरी, मुठ्ठी भर भर के दिया जाता है प्रसाद  

भक्तों के द्वारा चढाय गये नारियल को केवल प्रसाद ही बनाया जाता है यहां के बच्चे महिला पुरुष सब मिलकर दिन भर पाली पाली से भक्तों को मुठ्ठीभर भर कर नारियल प्रसाद वितरण करते हैं तथा प्रत्येक सोमवार को खीर भी वितरण किया जाता है । 15 से 20 लोग हमेशा प्रसाद के लिए नारियल फोडते रहते है उसके बाद भी बचा हुआ नारियल का ढेरी लगा हुआ है । 

सप्ताह में एक बार होता है चढावे राशि का लेखा जोखा* 

लिंगेश्वर महादेव में भक्तों द्वारा अपनी अपनी श्रद्धा से चढाये गये रुपये प्रति दिन कई हजार रुपये होता है जिसका पूरा हिसाब किताब ग्रामीणों द्वारा प्रत्येक मंगलवार को शाम को किया जाता है । तथा शौकीलाल सेठ एवं हेमसागर प्रधान के नाम से बैंक में संयुक्त खाता खोला गया है उस बैंक खाते में पूरी राशि जमा कर दिया जाता है ग्रामीणों का कहना की पूरा हिसाब किताब में पार्दर्शिता बनी रहे तथा आगे चलकर मंदिर निर्माण करना है ।

व्यवस्था में रात दिन लगे रहते है ग्रामीण

भक्तों के भारी भीड को नियंत्रित करने एवं अन्य व्यवस्था को लेकर ग्राम किशनपुर के महिलाऐं भी हमेशा लगी रहती हैं जिसमें राधिका बारीक, आल्हहदिनी नायक, भुमिषुता बारीक, गोपिका बारीक, सुजाता बारीक, सुरेंद्री बारीक, जतनशिला बारीक, गंर्धबी बारीक, भगवती ठाकुर, अर्चना साहू, इला बारीक, संजूकला, महेंद्री सेठ, चंदनतुला सेठ, यशस्वी नायक, पंकजीनी बारीक एवं हिंगल बारीक ।

इसी प्रकार पुरूष वर्ग में नरेश नायक, लिंगराज बारीक, दुबराज बारीक, अरखित बारीक, इंद्रजीत बारीक, दिनेश बारीक, जयकृष्ण सेठ, भुषण बारीक, गोकुल बारीक, नरेंद्र बारीक, खिरोद बारीक, राकेश बारीक, रामबिहारी प्रधान, हृषिकेश बारीक, बलराम साहू, अग्नि साहू, करण सेठ, अनिल बारीक, निलेश नायक भक्तों की सेवा में लगे हुए हैं ।



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