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कंरंट से हाथी की मौत मामले में रेंजर डिप्टी रेंजर पर भी हो कार्यवाही

नामदेव साहू छत्तीसगढ़ संपादक 

महासमुंद= जिले की सीमा से सटे देवपुर वन परीक्षेत्र में हाथी की करंट से मौत के मामले में एक आदत वनरक्षक के निलंबन की कार्रवाई को अपर्याप्त करार देते हुए वसुंधरा सामाजिक सेवा संस्थान कसडोल के अध्यक्ष अनुराग मिश्रा ने हाथी की करंट से मौत के मामले में प्रभारी परीक्षेत्र अधिकारी एवं सहायक वन परीक्षेत्र अधिकारी के खिलाड़ी सख्त कार्रवाई की मांग की है। अनुराग मिश्रा के मुताबिक कसडोल उपवन मंडल अंतर्गत देवपुर अर्जुनी एवं सोनाखान क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकार की घटनाएं लगातार घटित होने की खबर प्रकाश में आते ही रहती है। अचरज की बात तो यह है कि हाथी की मौत जैसे संवेदनशील मामले में विभाग के डीएफओ मयंक अग्रवाल द्वारा अभी तक सिर्फ वनरक्षक पर कार्यवाही की गई है जबकि वनरक्षक 1000 हेक्टेयर से भी अधिक वन भूमि की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं वन विश्राम गृह देवपुर में वीआईपी का दौरा कार्यक्रम आए दिन होते ही रहता है। इसमें भी तीमारदारी के लिए वनरक्षक हो समय देकर अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। ऐसे में केवल वनरक्षक कोई निलंबित किया जाए, यह न्याय नहीं है। उक्त घटना के लिए प्रभारी रेंजर पंचराम यादव तथा डिप्टी रेंजर नितिन नायक बी बराबर के जिम्मेदार हैं। यह भी बताया गया है कि, घटनास्थल के समीप वन विश्राम गृह में निवासरत बार नवापारा परी क्षेत्र के डिप्टी रेंजर रामपुर तथा दो वनरक्षक विभागीय आवास में रहते हैं। क्या इन्होंने हाथी के चिंगार की आवाज नहीं सुनी ? अगर सुने होते तो हाथी की मृत्यु की सूचना तुरंत विभाग के उच्च अधिकारियों को यह जाना 

चाहिए था जब सूचना नहीं मिली है इसका अर्थ घटना दिनांक को उक्त कर्मचारी भी मुख्यालय में अनुपस्थित रहा होगा यह भी जांच का विषय है। यह भी बताया गया जी घटना दिनांक को रेंजर एवं डिप्टी रेंजर मुख्यालय में नहीं थे इसकी जांच कर संबंधित सभी 1 अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग वसुंधरा सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा की गई है

अपने कार्यों की वजह से लगातार सुर्खियों में रहे पंचराम यादव को देवपुर के प्रभारी रेंजर के पद से हटाकर देवपुर में ही उनके मूल पद पर विशेष कर्तव्य अधिकारी बनाया गया है. वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार वनमण्डल के पत्र क्रमांक 2119 दिनांक 09.11.2022 द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन के अनुसार दिनांक 07.11.2022 को देवपुर परिक्षेत्र बलौदाबाजार वनमण्डल के अंतर्गत पूर्व गिधपुरी बीट कक्ष क्रमांक 299 में एक नर हाथी (उम्र लगभग 22 से 25 वर्ष) मृत अवस्था में पाया गया. मृत हाथी के शव परीक्षण के लिए 3 पशु चिकित्सकों का दल गठित किया गया था. शव के परीक्षण उपरांत पशु चिकित्सक दल द्वारा हाथी की मृत्यु विद्युत करंट से होना बताया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव को विधिवत दफनाया गया. गांव के जिन व्यक्तियों ने विद्युत करंट का फंदा लगाया था, उस फंदे की जब्ती बनाई गई है. घटित घटना का पीओआर क्रमांक 13229/23 दिनांक 07.11.2022 दर्ज किया गया है. प्रकरण पंजीबद्ध होने के बाद अभियुक्तों की तफ्तीश जारी है. वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार के पत्र क्रमांक 4479 दिनांक 07.11.2022 के द्वारा पंचराम यादव उप वनक्षेत्रपाल, प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी देवपुर परिक्षेत्र को उक्त घटना के लिए स्पष्टीकरण जारी कर जवाब चाहा गया है कि यदि पंचराम यादव के द्वारा वन क्षेत्रों का निरंतर निरीक्षण किया जाता तो फंदे की जानकारी होती हाथी मृत्यु की घटना की सूचना 72 घंटे बाद मिलना अत्यंत खेदजनक है एवं कर्तव्य में घोर लापरवाही को दर्शाता. यादव का अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं है.पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिनांक 07.11.2022 में हाथी की मृत्यु का समय पोस्टमार्टम से 84 घंटे पूर्व होना दर्शित है. इससे स्पष्ट होता है कि हाथी की मृत्यु की सूचना लगभग 03 दिवस बाद प्राप्त हुई है. वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार के उपरोक्त प्रतिवेदन एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि हाथी मृत्यु की घटना की सूचना लगभग 03 दिवस बाद मिलना और क्षेत्र में विद्युत करंट फंदे का पाया जाना प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी पंचराम यादव के कर्तव्य में गंभीर चूक और घोर लापरवाही को दर्शाता है. यह भी स्पष्ट होता है कि प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी का अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं है. उनका उक्त कृत्य छग सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन है. परिक्षेत्र अधिकारी और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों का मुख्य दायित्व वनों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा होती है. अतः उपरोक्त तथ्यों के आधार पर पूर्ण विचारोपरांत आदेश पारित किया गया.प्रभार के बाद से ही चर्चा में रहे

रेंजर का प्रभार संभालते ही लगातार देवपुर क्षेत्र में हुई शिकार की घटनाओं से वे चर्चा में थे, पर लगातार समाचार प्रकाशन और शिकायतों सहित सूचना के अधिकार में जानकारी नहीं देने के मामले में भी उन्हें तीन बार 25-25 हजार का जुर्माना लगने के बाद भी उन पर विभागीय तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. पर उनकी मनमानी के चलते जब एक हाथी की मौत हुई, तब भी उन्हें देवपुर से हटाने की बजाय उन्हें मात्र रेंजर पद से ही हटाया गया. जानकारों का मानना है कि यदि पहले के इन पर लगे आरोपों पर संज्ञान लेकर विभाग कार्रवाई करता तो शायद हाथी की मौत नहीं होती.

पकड़े जा चुके है करंट बिछाने वाले दो आरोपी 

े देवपुर परिक्षेत्र अंतर्गत गिधपुरी परिसर में विगत दिवस एक नर हाथी मृत पाया गया, वनमंडलाधिकारी द्वारा 03 डॉक्टरों के दल का गठन कर उक्त मृत हाथी का शव परीक्षण कराया गया, परीक्षण उपरांत हाथी की मृत्यु विद्युत करंट से होना पाया गया। घटना स्थल का मुआयना करने पर तार नुमा फंदा पाया गया, जिससे पता चलता है कि हाथी की मृत्यु उक्त तार नुमा फंदे में संचालित विद्युत करंट की चपेट में आने से हुई है।जिसमें वन अपराध अधिनियम के तहत 07 नवंबर 2022 के तहत प्रकरण दर्ज की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला तथा मुख्य वन संरक्षक रायपुर जे. आर. नायक और वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार मयंक अग्रवाल के निर्देशानुसार त्वरित कार्यवाही करते हुए तार फंदा लगाने वाले की पतासाजी कर दो संदिग्ध व्यक्तियों नकुल पिता रामेश्वर भोई, ग्राम पकरीद तथा जोहित पिता नारायण बरिहा, ग्राम पकरीद से पुछताछ की गई। जिस पर उक्त व्यक्तियों द्वारा फंदा लगाना स्वीकार किया गया।


दोनो अपराधियों के विरुद्ध वन्यप्राणी अधिनियम की धारा के तहत कार्यवाही कर जिला न्यायालय बलौदाबाजार में पेश किया गया। जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेड के द्वारा 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। गौरतबल है कि लोगों को जागरूक करने हेतु विभाग द्वारा डॉग स्क्वाईड की मदद ली जा रही है एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, एन.जी.ओ. जो इस कार्य में पहले उदन्ती- सीतानदी टायगर रिजर्व में कार्य कर चुके हैं, उनकी मदद भी ली जा रही है। वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभाग द्वारा तत्परता से कार्यवाही की जा रही है।

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