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एकमात्र ऐसी अदालत जहां देवी-देवताओं की होती है पेशी, गलती के अनुसार मिलती है सजा = पढ़े क्या है खास

 कोंडागांव= केशकाल. किसी भी गलती के लिए सजा मिलना वाजिब है। न्याय के लिए अदालत की व्यवस्था से हम सभी परिचित हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अदालत के बारे में बताने जा रहे है जहां इंसानों की नहीं देवी देवताओं की पेशी होती है और जज सुनवाई भी करते है जहा दोष सिद्ध तो सजा अन्यथा रिहाई।

यह सत्य घटना छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की है। कोंडागांव के केशकाल में परंपरानुसार प्रतिवर्ष भादो मास के कृष्ण पक्ष में शनिवार के दिन भादो जातरा (आदिवासियों का पर्व) का आयोजन किया जाता है। जातरा (यात्रा) के पहले पांच अथवा सात शनिवार को सेवा (विशेष पूजा) की जाती है और अंतिम शनिवार के दिन इस जातरा का आयोजन होता है। इसी तर्ज में आज केशकाल में 20 अगस्त को जात्रा होगी जिसमे देवताओं की अदालत लगेगी। सुनवाई भी होगी, यदि कोई देवी देवता पर दोष सिद्ध तो सजा अन्यथा रिहाई। बेशक, यह सुनने में हैरान रह जाएंगे लेकिन आज हम आपको इसकी पीछे की पूरी कहानी बातएंगे।

बस्तर के केशकाल में लगती है एक ऐसी अदालत, जहां देवी-देवताओं की पेशी होती है। जज की भूमिका में होती हैं बारह मोड़ वाली सर्पीली केशकाल घाटी के ऊपर मंदिर में विराजित भंगाराम देवी। प्रार्थी के रूप में मौजूद श्रद्धालुओं की शिकायतों के आधार पर देवी-देवताओं को निलंबन, मान्यता समाप्ति से लेकर सजा-ए-मौत तक का दंड सुनाया जाता है। आज शनिवार को एक बार फिर लगेगी यह अद्भुत अदालत जिसमे हजारों लोग जुटेंगे।

देवताओं के खिलाफ होती है शिकायत= इसमें नौ परगना में फैले 55 राजस्व ग्रामों में विराजित तमाम देवी-देवता, लाठ, आंगा, छत्र, डोली आदि के रूप में यहां लाए जाते हैं। देवी-देवताओं को भी पक्ष रखने का मौका मिलता है। गांव पर आपदा या विपत्ति अथवा पूजा- अर्चना के बाद भी जिंदगी में परेशानियां बनी रहने पर देवी-देवताओं को दोषी ठहराते हुए भंगाराम माई की अदालत में शिकायत की जाती है। देवी-देवताओं को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। उनके प्रतिनिधि के रूप में पुजारी, गायता, सिरहा, मांझी व मुखिया मौजूद रहते हैं।


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