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कलेक्टर ने किया उल्टी दस्त प्रभावित गांवो का दौरा , दिये जरूरी निर्देश

महासमुंद। पिथौरा, विकासखण्ड के दूरस्थ ग्रामो में डायरिया के प्रकोप को देखते हुए कलेक्टर द्वारा स्वयम प्रभावित ग्राम पंचायत बम्हनी के आश्रित ग्राम केशरपुर मे डायरिया के प्रकोप से पीड़ित मरीजों से मिलने पहुंचे।

     मिली जानकारी के अनुसार ग्राम केशरपुर मे 60 से अधिक ग्रामीण डायरिया से ग्रस्त हुए है । अधिकांश मरीजो का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा मे हो रहा है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे भर्ती मरीजो के इलाज की जानकारी कलेक्टर कलेक्टर द्वारा ली गयी एवम स्वास्थ्य अमले को इस पर लगातार निगाह बनाये रखने हेतु निर्देशित किया । इसके अलावा प्रभावित स्थल केशरपुर का भी निरीक्षण किया और स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा कर उनको मौसमी बीमारियों के दुष्प्रभाव को लेकर भी अलर्ट किया।इसके बाद ग्राम केशरपुर के अतिरिक्त ग्राम सागुनढाप और ग्राम कंचनपुर मे भी डायरिया के प्रकोप की जानकारी मिलने पर कलेक्टर उक्त दोनो ग्राम भी पहुँचे और स्वास्थ्य कैंप का निरीक्षण किया । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अभियान चलाकर प्रभावित ग्राम सहित निकट के सभी ग्रामो मे पानी की जांच कर पानी का आवश्यक उपचार करने हेतु निर्देशित किया गया है।

इसके अलावा कलेक्टर द्वारा पिथौरा स्थित अनुसूचित जाति कन्या आश्रम पहुचकर निरीक्षण किया गया । बच्चो की सुरक्षा का ध्यान रखने का विशेष निर्देश अधिक्षिका को दिया गया ।इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी राकेश कुमार गोलछा, तहसीलदार लीलाधर कंवर, नायब तहसीलदार द्वय देवेंद्र नेताम, उमेश लहरी, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ तारा अग्रवाल सहित विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

डायरिया से 2 मौत की चर्चा =  दूसरी ओर डायरिया प्रभावित क्षेत्र में एक 37 वर्षीय महिला एवम 4 साल की मासूम की मौत होने की चर्चा आम है।बताया जाता है कि डायरिया से प्रभावित कुछ मरीज प्रशासन की लगातार समझाइस के बाद भी क्षेत्र के झोला छाप डॉक्टरों से उपचार करवा रहे गया।ग्रामीणों के अनुसार इन्ही झोला छाप डॉक्टरों के उपचार की वजह से उक्त मौतें हुई है।चूंकि दोनों ही मौतों में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में सूचना के बगैर ही अंतिम संस्कार कर दिया, लिहाजा प्रशासन इन मौतों की पुष्टि नही कर पा रहा है।


जिले भर में झोला डॉक्टरों की बाढ़ = मीली जानकारी के अनुसार जिले में झोला छाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गयी है।डॉक्टर बनने वालो में कुछ लोग तो शासकीय सेवक भी है जिन्हें मेडिकल साइंस से कोई लेना देना नही है परन्तु वे घर घर जाकर लोगो की कुशलक्षेम पूछ कर बकायदा इंजेक्शन लगा कर उपचार कर रहे है।इसके अलावा कुछ कस्बाई क्षेत्र में तो झोला डॉक्टरों द्वारा बकायदा नर्सिंग होम संचालित किया जा रहा है।बताया जाता है कि ये किसी डिग्री धारी डॉक्टर के नाम से नर्सिंग होम का संचालन कर स्वयम उपचार कर आम लोगो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे है।इन झोला छाप डॉक्टरों ने आम लोगो के मन मे ऐसी छाप छोड़ कर ब्रेन वाश किया है कि इनके मरीज सरकारी अस्पताल से नफरत करने लगे है।लिहाजा ये झोला छाप डॉक्टरों को अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा कुर्बान कर अपने ही स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने लगे है।दूसरी ओर प्रशासन भी इस तरह के डॉक्टरों पर कार्यवाही के नाम और किसी ठोस कार्यवाही करने की बजाय मात्र खानापूर्ति ही करता दिखाई देता है।

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