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विशेष : अबूझमाड़ के अंदर तक पहुंची सरकार, सर्वे के साथ खत्म हो रहा विकास का इंतजार …


 फीचर स्टोरी. छत्तीसगढ़…प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ एक अपार संभावनाओं का प्रदेश. एक ऐसा प्रदेश जहाँ खनिज संपदा के साथ वन संपदा भी भरपूर है. यहाँ सघन साल वन का ऐसा जंगल जिसके एक अंदर एक दुनिया ऐसी भी जिसे अबूझमाड़ कहा जाता है. बदलते छत्तीसगढ़ में आज बात इसी अबूझमाड़ की दुनिया की.

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग जो कि 7 जिलों को मिलाकर बना है. इसी संभाग में एक जिला है नारायणपुर है. नारायणपुर जिला का हिस्सा ही अबूझमाड़ कहलाता है. अबूझमाड़ इसलिए क्योंकि यहाँ का जंगल संघन है और आज भी जंगल के अंदर रहने वाले हजारों आदिवासियों की पहुँच की बाहरी दुनिया तक नहीं हो पाई है. दुर्गम पहाड़ी रास्तों के अंदर कई छोटे-छोटे गाँव और बस्तियाँ हैं. ऐसे गाँवों और बस्तियों तक पहुँच न ही अंग्रेजी शासनकाल में हो सका था और न ही आजादी के 70 साल बाद भी. हालांकि कोशिशें भरपूर होती रही. कई बार सर्वे का काम चला. कुछ गाँवों की पहचान भी हुई और सरकार कुछ हद तक जंगल के अंदर तक पहुँच भी है. इससे सरकार की योजनाएं भी पहुँची और विकास भी होता चला. लेकिन काम बहुत ही धीमा रहा. अब मौजूदा भूपेश सरकार में अबूझ को पूरी तरह बूझ लेने की कोशिशें तेज है.

घोर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ इलाके में सरकार तेजी के साथ मसाहती सर्वे करा रही है. सर्वे के साथ ही जंगल के अंदर के गाँवों के बारे में पता चल रहा है. आदिवासियों तक सरकार अपनी योजनाओं को पहुँचा रही है. विकास कई गुना रफ्तार के साथ अब जंगल के अंदर तक पहुँच रहा है.

नारायणपुर जिला प्रशासन अधिसूचित 246 गांवों का मसाहती सर्वे करा रहा है, जिससे पता चल सके कि किसके खेत की सीमा कहां तक है. मौजूदा जानकारी के मुताबिक 5 हजार वर्ग किलोमीटर में अबूझमाड़ बसा है. जिसके बारे में अब तक कहा जाता रहा कि इस इलाके को कोई बूझ नहीं पाया यानि समझ नहीं पाया. यही वजह रही कि आजादी के 75 साल बाद भी यहाँ सरकारी योजनाएं नहीं पहुँच पायीं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर तेजी से सर्वे किया जा रहा है. मसाहती खसरा मिलने से किसानों का सोसायटी में पंजीयन हो सकेगा और धान बेच पाएंगे. किसानों के खेत मे अब डबरी निर्माण, सिंचाई हेतु सोलर पंप की सुविधा, कृषि एवं उद्यानिकी की योजनाओं का लाभ मिल पाएगा. कृषि विभाग से अब किसानों को विभिन्न फसलों के बीज वितरण के साथ-साथ मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. किसानों के खेत में ड्रीप लाईन बिछायी जा रही है.

वैसे नक्सल चुनौती के बीच अबूझमाड़ के अंदर विकास कराना सरकार के लिए बहुत ही बड़ा खतरा है. लेकिन सरकार ने जोखिम उठाते हुए तय किया है कि माड़ के आदिवासी अब समाज की मुख्यधारा से दूर नहीं रहेंगे. सरकार के इन प्रयासों को सफलता भी मिल रही है.

आइये बात सरकार के इन्हीं प्रयासों और सफलता पर करते हैं. बताते हैं कि कैसे जब सरकार की योजनाएं आदिवासियों तक पहुँची तो वे खुशी से झूम उठे थे. सरकार की ओर से तेजी अब माड़ इलाके में विकास जारी है. और सरकारी योजनाओं का लाभ आदिवासियों को मिल रहा है.
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